जवानी की जोर कहानी

जवानी की जोर कहानी

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जवानी की जोर कहानी

जवानी की जोर कहानी
जवानी की जोर जब लगती है तो होश उर जाता है, समझने की शक्ती कम हो जाती है। आंतरीक ताकत को संतुलित करने के लिऐ शरीर की पूरी ताकत का जोर लग जाता है, फिर भी मन अशांत बना रहता है।
नियंत्रण उपायः
जवानी की नीखार को दर्पण में देेेखनेे पर मन की प्रज्जवलता का संम्मन होता है। अपनी जवानी का दंभ भी महसुश होता है। उसे अपनी सुुुन्दरता का वास्तवीक वोध होता है। अपनी जवानी की नीखार उसके उभार तथा मन की चंंचलाता का प्रतीरुपन का भान होनेे के लिए नंगी बदन का नीकट से अवलोकन जरुरी है। वदन का सहलाना सजना सवारना अच्छा लगता है।
प्रर्दशन स्थलःः
सबीता की शादी नजदीक आ रहा था। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जाता है वसे-ंवसे उसके अंतरमन मे आनावालेे समय के ख्याल परेेेशान कर रही थी। सवीता का तजना सवरन तथा उसके अपानेे अंगे के प्रती ज्यादा लगाव वढता जा रहा था। उसके अपने अंंगे से होने वाले छेडछाड तथा मस्ती के समय की यादेे सतानेे लगती थी। वह अपनी अंगो को अकेले मे खोलकर देेखा करती थी। उसको छुुकर सहलाकर आन्नंदीत होने का सुख मिल रहा था। कभी-कभी वह सोचती की ऐसा होता वैैैैसा होता और अपने अंगो से खेलने का उसका अंदाज वदल जाता था। सवीता के उभरे नीखरे अंग उसके मन को ताकत देती की वह एक अच्छी चहेेेेती बनेगी। वह अपने चाहने वाले को पुरा संंतुुुुस्ट कर देेगी। वह अपने को नंगा करके अपने अंगो के साथ खेलती है। उसको सहलाकर दवाकर अपनै को संतुस्ट करने का असफल प्रयास करती है।
लेखक- लस्टलवीगकॅाम।
Author- lustlovingcom

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