अन्नदाता

अन्नदाता

भारतीय किसान की मार्गदर्शिका बनकर उसके व्यथा को व्यक्त करता यह कविता समय के साथ जुड़ने तथा सिखने को प्रभावी उपाय मानकर चलते हुए सगठनात्मक बिकाश को आगे लाने की प्रेरना देता है। ज्ञान विज्ञान और कार्य कुशलता के साथ साथ सामुहिक बिचार बिमर्ष के स्थान को भी सही मानता है। अन्नदाता की स्थिती 2021 हमारे लिए एक चुनौती पुर्ण समस्या है।

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