निराशा की आग

निराशा की आग

निराशा की आग लॆख

जीवन भी एक अजीव पहेली है। उम्मीदों का दामन थामे जब जिंदगी आगे बढ़ती रहती है तो फुर्सत कहां मिलता है कि इसके बिच किसी अनहोनी के बारे मे सोचें। आजकल का तो समय ही है कि अति क्षिण संभावना भी दिखे तो अपनी निगाहें जमाये रखो यानी सकारात्मक सोच को बनाये रखो।

एक भौतिकतावादी मानव के मन के लिए यही सबसे बड़ी समस्या होती है कि उसे थोडी भी कष्ट की बात को सोचना पड़े तो वह अपना मुह मोड़ लेता है और जब अनहोनी होती है तो उसके लिए खुद को संभलना मुश्किल हो जाता है। गीता मे कहा गया है कि यदि तुम सुख और दुख दोनो मे एकसमान बने रहोगे तो तुम्हे सुख की वर्षा न तो भींगा सकेगी नही दुख की बिपता झुका सकेगी। इस दिव्यता को पाने के लिए साधना की जरुरत है जो भोगवादी समाज के लिए कठिन है।

यहां हम लेखिका के द्वारा महसुस की जाने वाली परिस्थिती की बिवेचना करके समझना चाहते है कि आखिर उसका निदान क्या है। एक दुर्धटना ने उसके मौत का खौफ तथा ख्वाईस जैसे अति प्रयोजन वाले तथ्य को समाप्त कर देता है। लिखिका अपने जीवन को मुल्यहीन समझने लगी है। उसकी निराशा उसके बिगत में अति उत्साहित होने को दर्शा रहा है और आज वह जिस जीवन को जी रही है उसको समझ पाना उसके लिए कठिन हो रहा है। यहां उन्हे गीता के अनुसार कठिन साधना की जरुरत है।

गृहस्थाश्रम जीवन के नीव पड़ने के बाद गुरु की नही गुरुत्व की व्याख्या करनी चाहीए। गुरुत्व से तातपर्य अपने अंदर की शक्ति को समझकर उसे जगाने की जरुरत है जहां से वह एक शक्तिशाली प्रभावी व्यक्तित्व को सवांरते हुए अपने भावी चुनौती को सामना कर सके। यह ओ दिव्य योग है जिससे स्वयं और अपने परिवार के क्ल्याण के साथ भलाई भी संभव है।

इसको क्रियांवित करने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ साहस और दुरदर्शी सोच के साथ समय के कठिन परिक्षा से गुजरना होगा। तभी एक मिट्टी परिशोधित होकर सोना के रुप मे श्रंगार का स्थान पा सकेगी।

हे मानव गहरी निराशा तो मृत्यू के समान है इतिहास मे कई ऐसे प्रसंग दर्ज है जिसमे लोगो को इससे निकाल पाना असंभव हो गया था। राजा शान्तनु तथा राजा दरशत को हम सोच सकते है। ऩिराश लोगो के मौन गुफा को तोड़ना कितना कठिन है इसका अऩुमान लगाना भी मुश्किल पड़ेगा। इसलिए अपने जीवन के उत्कर्ष के बारे मे सोंचो। तुम्हारे अंदर बैठी सुशप्त चेतना को जगाओ और आगे बढ़ो। सारा संसार तुम्हारे स्वागत के लिए तैयार है। एक मिशाल बनो। लोगो को अपनी आदर्शता का पहचान कराओ। इस तथ्यगत बातों का नित चिंतन मनन करो। तुम सोचो तुम एक सशक्त उर्जावान व्यक्ति हो तुम्हारे अंदर बर्तमान से लड़ने की कार्य क्षमता है। तुम्हारे अंदर की वाकपटुता, तुम्हारा बिनयशील व्यवहार, तुम्हारा संकल्प कभी तुम्हारा साथ नही छोड़ता है वल्कि तुम उससे मुह मोड़ लेते हो। ये ओ हथियार है जिससे निराशा को काटा जा सकता है। संभावना को तराशकर खुश हुआ जा सकता है। तुम जब ऐसा करोगे तो बिश्वास रखो तुम्हारी दिव्य चेतना जागृत होकर तुमको परमात्मा से साक्षतकार करा देगा। तुम मुक्ति भाव का अनुभव करते हुए दिव्य धाम को पाओगे। तुम्हारा समस्त कल्याण हो।

संपादकिय लेखः अमर नाथ साहु

वक्त कहीं गया नही है, आज आप जहां है वही से एक नयी शुरुआत कर सकते है। आपकी मेहनत आपको सफलता तक ले जायेगी।

वेव एक्सपर्टः राजकुमार अकेला

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  1. खुद की तलाश यदि वक्त के साथ नही तो उसकी बड़ी किमत देनी पड़ती है। लेखिका के भाव पुर्ण प्रसंग को संपादक के बिचार के साथ एक अच्छी अभिव्यक्ति है।
  2. वक्त के आईना को निहारने का मानव मन यदि किसी अनहोनी के बाद हो तो वह एक यादगार जिन्दगी की कहानी को कहता है। उद्दरीत प्रसंग मे लेखिका अपनी व्यथा को सवारती है।
  3. शिक्षा दान महादान के भावपुर्ण बिचार को संजोता ये काव्य लेख एक जीवनोपयोगी तथ्य को उजागर करता है।
  4. गुरुर काव्य लेख हमें दैनिक जीवन से जुड़ी तोड़ जोड़ से होने वाले बिसंगती की ओर से सावधान रहने की कला की ओर ईसारा कर रहा है।
  5. Loving Daddy is a deep impressive emotional dealing by writer that guide your coming situation handling power.

By sneha

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