sneha

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आजादी के अमृत महोत्सव

आजादी के अमृत महोत्सव

आजादी के अमृत महोत्सव आज हम आजादी के 76 वें वर्ष में है। स्वतंत्र भारत के 75 वर्ष भारतीय समाज को पुर्गठण में एक महत्वपुर्ण भुमिका निभाया है। लम्बी गुलामी के कारण हमें कुंठीत मानसिकता से बाहर निकलने मे हमारे समाज को काफी संधर्ष करना पड़ा है। अब जागरुकता का नया दौर आया है। हम राष्ट्रिय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानडंड को समझकर अपनी प्रतिक्रिया देने लगे है। यही से हमारा भाग्योदय का सुरज भी उपर जढ़ने लगा है। हमारी बढ़ती प्रखरता के साथ हमारी चुनौती भी बढ़ा है इसके साथ हमारी चेतना भी जागृत हुई है। अब हम चुनौती…
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भुक्खड कहीं का

भुक्खड कहीं का

भुख्खड़ कहीं का भुक्खड कहीं का आजकल के आपाधापी जिन्दगी के भागमभाग मे उलझन भी कम नही है। धर्म के घटने से आसुरी प्रबृति जन्म लेने लगी है। बेलगाम बिज्ञान रुपी धोड़े की चाभी उडण्डों के लग गई है, जिसमे मानव मुल्यो का चितन ही नही है। हर बस्तु को बिकाऊ मानकर बजार मे उतार रहा है। अमुल्यवान बस्तु भी हांफने लगी है कि कही उसका भी दाम न लग जाये। यदी ऐसा हुआ तो उसे भी बाजार की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। प्यार मोहब्बत के नाजुक रिस्तो भी मौज मस्ती का साधन बनते जा रहे है। टुटते बनते…
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प्यारा बचपन

प्यारा बचपन

Childhood has basic information for success in life. In this time expression of feeling is easy and no any person react seriously but this type of action makes real character of childhood. Working direction and priority of work give the strength of desire in life. Many person try to change it but this is not possible in major form. So your light part of future is visualized through you childhood.time. जीवन को बिकाशोन्नमुख बनाने के लिए आजकल प्रयास बहुत निचे स्तर से शुरु हो गया है। व्यक्ति स्वयं भी खुद को जानने के लिए बचपन की यादोॆ का सहारा लेता…
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जीवन के पार चलो

जीवन के पार चलो

जीवन के पार चलो जीवन के पार देखने वाला दृष्टि पाकर व्यक्ति अहलादित हो सकता है। आन्दित हुए व्यक्ति सतमार्ग पर चलना शुरु भी कर सकता है, लेकिन उसके लक्ष्य तक पहुँचने मे आने वाली वाधा को पार जाने की शक्ति समर्थ का होना भी जरुरी है। इसका पुर्व पुर्ण ज्ञान होना संभव नही है। इसके लिए तो व्यक्ति का संकल्प शक्ति ही याचक बन सकता है। यही वो शक्ति है, जो व्यक्ति को पार जाने के लिए यथेष्ट बल को नियोजित कर बाधा से पार ले जायेगा। हमारे शरीर के अंदर बिभिन्न धटको मे बल समाहित है, जिसका यथोसमय…
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वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत    यह व्रत नारी स्वयं को सुहागन बनाये रखने के लिए करती है। सुहागन स्त्री को समाजिक तथा मानसिक दोनो का समायोजन पति के द्वारा ही संभव होता है। नारी के मान सम्मान की रक्षा का प्रभाव पुरुष पर ही होता है। अपने पति को समर्पित पत्नी का जीवन आशा और बिश्वास के साथ आगे बढ़ता जाता है। शारीर सौन्दैर्य घटता है तथा विश्वास और टटस्थता बढ़ती जाती है। स्त्री की संवेदना अपने पती के प्रती इतना सुदृढ़ हो जाता है कि वह अपने पति के सिवाय किसी के प्रती सोचना भी पसंद नही करती है। कहते…
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मुर्ती पुजा

मुर्ती पुजा                                                      मुर्ती पुजा का इतिहास बहुत पुराना है। मानव ने जबसे जीवन को समझना शुरु किया तभी से उन्होने चित्र रुप का निरुपण किया। उसके भय को एक सहारे की जरुरत थी। यही सहारा मुर्ति के पुजा का स्थान सुनिश्चित किया। मानव के बिकाश की यात्रा का इतिहास आज के मानव को बुद्दिमान सावित करता है। लेकिन मुल बिषय डर आज भी है। डर का नियोजन समय के साथ तथा व्यक्ति दर व्यक्ति अलग - अलग होता है, तथा किया जाने वाला उपाय भी अलग होता है। लेकिन धार्मिक मान्यता हमारे अंदर जो भाव पैदा करता है, उससे…
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युद्ध से धर्म

युद्ध से धर्म

युद्द से धर्म गीता मे कहा गया है कि युद्द अंतिम बिकल्प है। यदी शांति के सारे उपाय विफल हो जाय तो युद्द के तरफ जाना चाहिए। स्थापित परंपरा के अनुरुप हमे आगे बढ़कर मानव की सेवा भाव के प्रति आरुढ़ रहना चाहिए। यदि इसमे अवरोध है तो इसका प्रतिकार हो तथा युद्ध भी यदि करना परे तो पिछे नही हटना चाहिए। इतिहास मे युद्ध की अनेको कहानी मिलती है। किस्से कहानीयों मे भी हम युद्द की गाथा सुनते है। मनोरंजन मे होने वाले आनन्द भी एक ऐसी ही गाथा से गुजरता है। चार्लस डार्विन ने कहा था अस्तित्व के…
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फिदाईन हमला

फिदाईन हमला

फिदाईन हमला आधुनिक दुनिया मे जब हथियारों की होर लगी है। लोग हथियार के अलग अलग रुप तैयार कर रहे है, जिससे की अचुक निशाना लगाया जाय तथा सफलता को सुनिश्चित किया जा सके। रोज हो रहे अनुसंधान ने एक अलग ही कौतुहल पैदा कर दिया है। साथ ही इस आधुनिक हथियार से सुरक्षा की तैयारी भी कि जा रही है। लेकिन एक परम्परागत हथियार का इस्तेमाल सबको चौका देता है। यह है मानविय विश्वास से आधात यानी फिदाईन हमला। इस प्रक्रिया के तहत विश्वास की पुरी प्रणाली का गहन अध्ययन किया जाता है। तत पश्चात हमला करने वाले तथा…
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एटम बम 2022

एटम बम 2022

एटम बम 2022 तृतीय बिश्व युद्द के अंतिम दौर का समय चल रहा है। आपसी तनाव की बढ़ती दुरीया ने युद्द के कई मोर्चा खोल दिया है। तनाव तैयारी को जन्म देता है। तैयारी मौजुदा हालात के अनुरुप ही तय होता है। जब तैयारी का मानदण्ड पुरा होता है तो वातचीत की तल्खी बढ़ जाती है। इसके बाद आपसी नाप तौल का दौर चलता है। पुरी तरह से संतुष्ट हो जाने के बाद माहौल को अपने अनुकुल बनाने की प्रक्रिया चलती है साथ ही जरुरी उपाय भी करने शुरु हो जाता है। फिर प्रतिद्वन्दी की उलटी गिनती शुरु हो जाती…
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मन क्यो धबड़ाये

मन क्यो धबड़ाये

मन क्यो धबड़ाये मन बड़ा ही चंचल है, यह हमारे शरीर मे होने वाले आंशिक हलचल को भी परिलक्षित कर देता है। यह कुछ क्षण ही स्थिर रह सकता है, इसके बाद इसका बदलना हो सकता है। मन मे घबड़ाहट कई कारणो से होता है, लेकिन मुल आधार होता है, शरीर के नष्ट होने का भय यह एक ऐसा कारक है, जिसके हावी होते ही मन मे धबड़ाहट का दौर चलना शुरु हो जाता है। समय के साथ ही इसकी तिव्रता बढ़ती ही जाती है। मन की धबड़ाहट को शांत करने के लिए हमे बाहर की घटनाओं का बर्णन देखना…
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