दुसरी सोमवारी कविता

Dusra Sombari

Bhakti poem

दुसरी सोमवारी को शिव की आराधना का ध्यान गहरा है। लगातार ध्यान शिव की आराधना के परम तक पहुँचने का प्रयास है। शिव की भक्ति को समझना कठिन है। भक्ति के सावन का ये पर्व हमे नित्य के साथ भक्ति के मार्ग को सुगम बना रहा है। शिव के चढ़ावा मे वेलपत्र का स्थान उत्तम है। बेलपत्र की गुणता को परिभाषित करता ये कविता भक्ति के रस को जगाने का एक प्रयास है। भक्ति को जितना चलाया जाय उतना बढ़ता जाता है। जिससे पुरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।

     बेलपत्र के साथ भक्ति का सम्बन्ध एक अटुट रिस्ता बांधता है। जिससे मन का बिचलन को नियंत्रित करना सुगम होता है। शिव की महीमा का प्रतिकात्मक रुप भी है। भक्तिभाव से परिपुर्ण आज का सोमबारी भगवत्व प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करे इसे आशा के साथ हमे कविता पाठ को आप तक प्रेषित करते है। जय शिव

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