गुलाब का जादू

love poem

जादू का खेल बड़ा ही निराला होता है। इसमे किया जाने वाला कार्य हमारी आकार्षण का मुख्य बिन्दु होता है। हमारा पुरा ध्याण जादु करने वाले के साथ-2 जादुई प्रक्रिया से बना रहता है। उत्साह की सिमा का अंदाज लगाना कठिन होता है। लगाव जुड़ाव का अपना ही एक गणित होता है। जिसको लोग मनोयोग से समझ कर प्रतिक्रया करते है। यदि आप भाव के प्रकट करने या भाव को समझने के धनी नही है तो प्रभाव उसके अनुरुप ही होगा।

सौन्दर्य का आपना एक आभा मंडल होता है। जो समझने वाला को ही अपना शिकार बनता है। जो जितना डुवता है उतना ही तीब्र प्रतिक्रिया भी करता है। गुलाब के फुल के माध्यम से एक प्रेमी जब आपने भाव को व्यक्त करता है, तो वह इस कार्य को करने के लिए स्वयं उपस्थित रहता है। क्योकि फुल तो एक माध्यम मात्र है, ये कहने के लिए की हमारी आभा मंडल को देखो और समझो।

समय के अनुरुप समझ भी बदलती रहती है। यह तो मन की बृती है, कि कौन क्या करेगा और कौन क्या चाहता है। यह काव्य रचना रिस्तो पर पड़ी धुल को साफ करके एक नयी एहसास को निरुपित करता है। एहसास का गहरा होना ही रिस्तो कि महत्ता को बनाता है। काया और माया दोनो का यहां अनुपम संयोग होता है। काया से माया को रचना है, और एक उद्वेग पुर्ण प्रभाव भी छोड़ना है। ये गुलाब अपनी पुरी परकाष्ठा को करके स्वयं भी निष्क्रिय हो जायेगा।

आपसी रिस्तो की प्रगाढ़ता को एक नयी उड़ान देता यह कविता, यह एहसास करता है, कि स्वांग रचने से प्रित की प्रिती का प्रभाव भी गहरा होता है। काव्य मे एक पुरी रचना का वर्णन किया गया है। नव यौवन का उत्साह को बनये रखने मे भारतीय संसकृति का अनुपम योगदान है। लेकिन आज के भागदौर के समय लोगो का इसना गहने एहसास मे उतरने का भी फुरसत नही है। वह तो वस धारा के साथ बहता चला जाता है। फुल को प्रभाव पुर्ण होना होता है। जिससे की इसका निष्पादन भी गहरा हो।

आज आप एक नयी उन्मादी बिचार को महसुस करेंगे। यदि आप निष्क्रिय है तो आपके तनाव को बढ़ा देगा और सक्रिय है तो आपके प्रभाव को बढ़ा देगा। यदि आप काल्पनिक जीवन के साथी है तो भी आपको मनोरंजित कर देगा।

भाव के अनुरुप यदि आप काव्य रचना को समझते हो तो अपनी प्रतिक्रिया कोमेंट बॉक्स मे जरुर दे। जिससे की आज के दौर का आकलन करने मे जरुरत मंद को सहुलियत हो। यह हिन्द

नोटः यदि आपको यह काव्य अच्छा लगे तो जरुरत मंद को यह लिंक भेजकर उनके उत्साह को बढ़ा दे। इसमे आपका भी मनोरंजन होगा।

लेखक एवं प्रषकः अमर नाथ साहु

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