चाहत का बिर्रो

बिर्रो

चाहत की नाजुक एहसास को गहराई से वर्णन करता यह कविता एक तुफान का रुप धारण करता है। इसका वास्तविक अंत अति प्रचंडता है, लेकिन इसका ठहराव अपने अंदर सारी प्रबृती को समेट लेता है।

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