यादों का 26 वाँ मैरेज एनीवर्षरी

दिदी को 26 वाँ मैरेज एनिवर्शरी

साथी के बाद के पहले एनीवर्षरी को सवारती एक नारी की जीवंत व्यथा को व्यक्त करता ये कविता हमे शसक्त रहने का पाठ पढ़ाती है। न जाने कब क्या हो जाये। हंसते गाते जीवन मे खलल पर जाये।

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