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मॉ वरदान दो

मॉ वरदान दो

ज्ञान की तरलता से हम सब परिचित है। ज्ञान का स्वध्याय तुलनात्मक है। इसके कारण इसके धारण मे बिविधता देखने को मिलती है। बास्तविक ज्ञान की आज भी खोज जारी है। मानव का चंचल मन जहां तक तरंगित हो पाता है हमारी जानकारी वही जाकर सिमित हो जाती है। मानव के मन के स्थिर करने तथा सुखमय जीवन निर्वाह के आगे हम सोच भी नही रहे।     ये अनन्त आकाश आज भी हमारे सोच से परे है। जब ये भाव मन मे आता है तो मन गुणित होने लगता है। इस गुणित मन को व्यवस्थित करने का योग जिसे मिलता…
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