पथ प्रदर्शक

पथ प्रदर्शक

पथ प्रदर्शक

जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही मार्ग का होना जरुरी है। इसके चुनाव के साथ ही इसपर चलने के लिए प्रतिवद्ध भी होना होता है। हमारी प्रतिवद्धता की शर्तें के अनुरुप हमे कार्य भी करने होते है। जो प्रतिभा के धनी होते है उनको यह कार्य सुगमता से हो जाता है क्योकि उनका स्वभाव ही ऐसा होता है कि वह खुद को संयमनऔर नियमन को आधार बनाते हुए आगे निकल जातें है। यह सब उनके स्वभाविक बृति का हिस्सा होता है जिससे लोगो को उनके बाड़े मे बहुत अधिक जानकारी नही होती है। लेकन कुछ इस प्रतिभा के धनी नही होते है उनको वर्तमान के साथ चलते हुए स्वयं को एक बंधन मे बांधकर चलना होता है जिससे की उनकी अपना लक्ष्य प्राप्त हो सके।

पथ प्रदर्शक के इस अंक मे हम इस बातों को गहराई से परताल करते हुए एक सफल होने के नियमन को उधृत करने की कोशीश की है। हमारे परिवेश हमारे अनुकूल नही होते वल्की हमे अपने अनुरुप बनाना होता है। इसके लिए वर्तमान के साथ समनजस्य स्थापित करना होता है। जो हमारे व्यवहार से मेल नही खाते है उनको बिरोध जताकर स्वयं के लिए पथ का निर्माण करना होता है जिसपर हम सही तरह से आगे निकल सके। समय और उर्जा की बचत जरुरी होता है।

कुछ लोग बड़े ही जिद्दी तरीके के होते है या तो कहें की उनका स्वभाव ही कुछ अलग होता है जिससे वह हमारे साथ मेल नही खाते और हमारे लिए वाधा उत्पन्न करते है ऐसे लोगे से दुरीयां बनान की श्रेष्गर होता है। क्योकी इससे हमारे द्वारा अपनाये जा रहे मार्ग का गमन मार्ग सही तरह से क्रियांवन हो पाता है।

सही लक्ष्य पर चलने वाला व्यक्ति अपने लक्ष्य को ही सवकुछ मानता है उसके लिए उसका कुछ भी पा लेना कोई मायने नही रखता है। इसलिए उनको अपने मार्ग के चुनाव के साथ ही स्वयं को पथ पर चलने के लिए सशक्त भी होना होता है। इसके लिए अपनाये जा रह मार्ग उनके जीवन को एक पहचान देते है। इसलिए उनका जीवन उनके लिए एक चुनौती पुर्ण कार्य होता है जिसको वे बड़े ही सिद्दत से करते है।

कुछ लोग इस तरह के विचार को अपना कर वड़े ही तेजी से आगे निकल जाते है क्योकि उनको स्वयं को समझ आ जाता है और वह आगे निकल जाता है। जिसको यह देर से समझ आती है उसके मार्ग वड़े ही कठीन सावित होते है। कोई भी निर्णय लेना और उसका स्वयं को निष्ठा के साथ कार्य करना उनकी जिम्मेदारी भी और जरुरी भी. इसके लिए आपको सतर्क रहना होगा। वाधा वहुँचाने वाले को मना करना होगा। उसकी नाराजगी हो सकती है लेकिन .यदी यह आपके लिए जरुरी है तो सही है।

हर पल के साथ सव्यं का मुल्यांकन भी करना होता है किउसके द्वाारा अपनाये जाने वाला अनुशासन सही और उसके लिए कल्याकारी है या नही .यदी कोई सुधार की जरुरत होती है तो उसका तुर्ंत अनुपालन जरुरी होता है जिससे की पथ प्रदर्शित होता रहे और सफलता के सोपान पर पहुँचा जा सके।

जीवन मे आगे पढ़ने के लिए हमें एक गुरु की जुरुरत होती है जिससे हम नियंत्रित हो सके। .यदि ऐसा कोई वंधन मे आप नही है तो यहां बतलाय् गये मा्र्ग का अनुसरण करे आपको सफलता निश्चित मिलेगी क्योकि अनुभव की भट्ठी से निकला सच जीवन को रौशन कर देता है। इस कथा बाचन का पुरा सार यही है कि खुद को तैयार करते हुए सही नर्णय के साथ सही योजना और सही माहौल को बनाकर हम आगे निकल सकते है।

लेखक एवं प्रेशकःः अमर नाथ साहु

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