महरानी भगवती मंदिर

महरानी भगवती मंदिर

God goddess
महरानी भगवती मंदिर
महरानी भगवती मंदिर

मधुबनी जिला के मधवापुर प्रखंड के साहर नवटोली गांव के पश्चिम मे स्थित भगवती मंदिर की स्थापना सन्  3/5/ 1996  ई. में की गई। भगवती मंदिर को सामान्यतया महरानी मंदिर के रुप में जाना जाता है। महारानी मंदीर में देवी शक्ति महारानी की पुजा की जाती है। इस देव शक्ति का स्थानीय मान्यता का इतिहास बहुत पुराना है। कहा जाता है कि 1934 के भुकम्प मे पुराने मंदिर के चोरो ओर का दिवाल निचे गिर गया था। नये मंदिर की स्थापना तथा उसका संचालन उनके मंदिर की स्थापना करने वाली परिवार के द्वारा की जाता है। स्थापना परिवार के मुख्य सदस्य के आस्था एवं विश्वास तथा उनके समर्पण का  एक अनुठा संगम है। भक्त की भक्ती माता के दैविक रुप को जिवंत रुप प्रदान करती है। देव रुप माता महारानी का पुरा संचालन उनके भक्त के द्वारा किया जाता है।

                पुजा अर्चना की पुरी व्यवस्था भक्त के द्वारा की जाती है। पुजा की व्यवस्था दिव्य रुप माता महारानी के निर्देशानुसार तय किया जाता है। समाजिक व्यवस्था के अनुरुप जले आ रहे व्यवस्था में पूर्ण आस्था तथा प्रामाणिकता के साथ पुजा किया जाता है।

        साल मे एक बार बार्षिक पुजा की जाती है तथा प्रत्येक शुक्रवार एवं सोमवार को प्रातः पुजा किया जाता है। दैनिक दर्शन की व्यवस्था है पर पुजा सप्ताह में सिर्फ दो बार किया जाता है।

देवरुपः

देवरुप माता महरनी जी की सात बहन की पुजा की जाती है। माता के सात बहन के नाम इस प्रकार है – (महमाया)बुढी माई, कालिका(चन्डी कालि), जगदम्बा, भगबती, लुकेस्वरी, आद्या भवानी, सीतला। माता के मंदिर में सात संकेतिक स्थल का निर्माण एक जगह पर किया गया है। प्रत्येक जगह पर पवित्र मिट्टी के गोल आकृति बनवाकर दिव्य रुप माता का प्रतिकात्मक स्थापना किया जाता है। देवरुप माता का स्थापना एक बार ही किया जाता है।

स्थापनाः

मंदिर के स्थापना का प्रस्तावना दिव्यरुप माता के पास रखने के बाद माता का चिंतन मनन शुरु हो गया। माता अपने सातो वहन के विचार विमर्श के बाद मंदिर के स्थापना को पारित कर दिया। मंदिर के स्थापना स्थल का चुनाव के लिए विभिन्न स्थल का नाम आया पर पुजा की सुविधा, स्थल की देवरुप शक्ति की जाँच तथा मेला के आयोजन स्थल परिसर की व्यवस्था को ध्यान में रखकर किया गया।

मंदिर कि स्थापनाः

पाँच पुर नाम वाले गाँव से मिट्टी लाया गया। उस मिट्टी को मिलाकर तथा पवित्र नदी से जल और मिट्टी लाकर माता का पिड़ी का स्थापना किया जाता है।

सामाज कल्यान

भगवती माता का स्वरुप दिव्य है। समाज मे होने वाले भुत-प्रेत अपराधीक प्रबृती के कारण समाज को काफी समस्या का समना करना पड़ता है जिसके निदान के लिए माता भगवती का आवाहन किया जाता है। ततपश्चात उसका निवारण किया जाता है। इसके फलस्वरूप देवता को कुछ भेट दिया जाता है। देवशक्ति के जानकार भगत पुरे समस्या को प्रत्यक्ष रुप से समाधान करते है।

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