मुझे-प्यार-दो

मुझे प्यार दो

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मुझे प्यार दो
मुझे प्यार दो

प्यार की जरुरत सबको है, यह एक ऐसा फल हो जो व्यक्ति को व्यक्ति से जोड़ता है। इसके सहारे हम जिवन की लम्बी यात्रा को आसानी से जिने का एहसास पाते है। प्यार को लोगो ने कलात्मकता का रुप देने की कला भी माना है। हमारी भावना को कहने के लिये हमे शब्द चाहिए तथा इनको यथा समय व्यक्त करने के लिये भी कला चाहिये।

प्यार को समझने तथा समझाने के लिये व्यक्ति के पास अपना का प्रारुप होता है जो वह अपने सामाज से सिखता है तथा इसका उपयोग करने की लगातार प्रयास जारी रखता है। फिर भी उसे लगता है कि उसकी पहुँच जहाँ होनी चाहीए नहीं है। इसलिए वह समय समय पर मुझे प्यार दो की हवा चलाती है। यह वह पल होता है जब वह सामने वाला का मुल्यांकन करती है। इसलिए हमे ऐसे नाजुक पल को बरे सावधानी के साथ जवाव देना चाहीये। समाने वाले का पुरा ध्यान रखना चाहीये। अपने जबाब से पहले हमे समाने वाले के उपर एक निगाह जरुर डालना चाहीये।

पल-पल का नाजुक एहसास हमे छोटी से छोटी भावना को आहत कर सकती है। क्यिकिं यदी हमारी संवेदनशीलता गहरा होगा तो एहसास भी गहरा होगा। इसलिए मेरा कहना है कि आप अपने जबाब को बड़ी सावधानी के साथ दे तथा अपने साथी का पुरा सहयोग प्राप्त करे। यदि हमारा जबाब का मुल्यांकन संकिर्ण रहा तो यह तनाव को जन्म देगा। तनाव प्यार का दुश्मन होता है यदि आपके प्रति नाकारात्मक भाव को जन्म दे गया। हमारा सिमित जबाव उसे समझने के भरपुर मौका देगा। आगे आपका साथ ही उसका विश्वास बनेगा। जय हिन्द

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