Chaurchan poem

Chaurchan

पुत्र को दिर्धायु बनाने के लिए चौरचन पर्व को करती माता, समाज के शुद्ध स्वरुप को अपने पुत्र मे स्थापना की मांग करती है। निष्कलंक बिकाश की कामना भगवान गणेश से करती हुई ब्रत को पुरा करती है।

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