अनोखी पहचान

Anokhi pahchan

अनोखी पहचान

पहचान व्यक्ति का स्वभाविक गुण होता है। यदि व्यक्ति स्व मे लीन है तो उसकी पहचान अनोखी हो जाती है। उसके प्रती हमारी उत्सुकता बढ़ जाती है। उसके बारे मे जानने की हमारी जिज्ञासा तिव्र हो जाती है। हमारी खुशी कुछ जानने तथा सिखने के प्रति ढृढ़ हो जाती है। दुसरी तरफ वैसे लोग होते है जिसको समझना कठीन होता है वह वड़े ही कुटील स्वभाव के होते है। जिसके भाव को देखकर असमंजस की स्थिती रहती है यहां भी जानने की जिज्ञासा होती है पर सावधानी के लिए बरन कुछ सिखने के लिए नही। अनोखी पहचान मे हम यह जानने की कोशिश करेंगे की हम स्वयं को आस्वश्त करे जिससे की व्यक्ति की पहचान सही हो सके जिससे आनेवाले समय मे व्यधान से बचा जा सके।

पहचानने वाले व्यक्ति के मन मे क्या चल रहा है इसको जानने के लिए हमे उसके व्यवहार को समझना होगा जिससे की उसके मानसिक स्तर का पता लगाया जा सके क्योकि मन की आँखे नही होती है जिससे की सही-सही आंकलन हो सके। व्यक्ति के व्यवहार उसके मन मे चल रहे विचार के अनुरुप ही होता है। उसके खुशी के प्रकटीकरण उसके व्यहार मे झलकता है। उसके समान्य व्यवहार और विशिष्ट व्यवहार अलग-अलग हो सकते है लेकिन वारीकी ज्ञान रखने वाले उसके व्यवहार से उसके मानसिक स्तर का पता लगा सकता है जिससे हम अपनी सावधानी को सुनिश्चित कर सकते है।

यदी अब हम व्यवहार वस किसी से जुड़ भी जाते है तो उसके आचरण का पता लगाने के लिए हमे सोचना परता है। इसके लिए हम उसके संस्कार को देखते है। उसके समान्य क्रिया कलोपों से उसके दिल की बात को समझी जा सकती है कि उस व्यक्ति के दिल मे क्या चल रहा है। संस्कार की स्थापना एक लम्बी प्रक्रिया के दौराण उसके खुशी का जरीया बन जाता है। उसमे उसके अंतरिक चिंतन का स्वरुप भी दिखता है। इस तरह के हमारी पारकी नजर हमे उसके बारे मे सबकुछ समझा देती है।

दिल मिल जाने के बाद कभी-कभी ऐसा होता है की व्यक्ति किसी समस्या को लेकर बड़ा ही उदिग्न हो जाता है, जिसको वह छिपाने की कोशिश करता है। बड़े ही सावधानी से व्यहार करता है जिससे की हम कुछ जान नही सके। इसके लिए हमे उसके चेहरे के भाव के साथ उसके बिचार को मिलाना परता है। वातचित के समय उसके चेहरे के भाव को जानना होता है, क्योकि चेहरा बिचार का आईना होता है। व्यक्ति इस भाषा को बदल नही सकता है। ऐसा करने से हमारी विश्वास करने की हमरी पहचान को एक अनोखी ताकत मिलेगी जिससे हम ज्यादा सशक्त होकर स्वयं को समाज मे स्थापित कर सकेगें तथा खुश रहने ही हमारी दिशा और दशा दोने बदल जायेगी। हम थोड़े मे भी ज्यादा आनन्द के साथ रह सकते है क्योकि हमे समय से पहले हमारी अनोखी पहचान हमे सावधना कर देगी।

इस पुरी प्रक्रिया अपने स्वभाव का हिस्सा बनाने इसके लिए हमे लगातार प्रयास करने होगे। हमे नियमित रुप से अपने बिचार के साथ प्रमाण जुटाने के स्वभाव को आगे रखना होगा जिससे हमारी अंधभक्ति दुर होगी और फिर कोई हमारे साथ गलत करने से पहले सोचेगा। जो होगा उसके हमे वहुत बड़े मानसिक प्रतारना का समना नही करना परेगा। यह हमारे अंतरिक शक्ति को भो प्रशस्त करता है जिससे हमारे जीवन मे सफलता पाने की उम्मीद भी बढ़ जाती है।

तो आईये हम भी इस अनोखी पहचान का हिस्सा बने और समय के साथ स्वयं को क्रियांवित करते हुए जीवन की आने वाली नविन चुनौती का सामना आसानी से कर सके। जय हिन्द

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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