कैरियर कॉउन्सेलिंग से लाभ

Carrier Counselling

Carrier counselling

कैरियर कॉउन्सेलिंग

कैरियर कॉउन्सेलिंग आजकल एक महत्वपुर्ण बिषय बन गया है। शिक्षा हासिल करने के बाद उचित आमदनी का होना आवश्यक होता है। इसके बिना हमारा जिवनयापन का कार्य पुरा नहीं होगा। कहा भी जाता है, कि शिक्षा का उदेश्य समुचित लाभ कमाना होता है। पहले के समय में हमारे विकाश के आयाम सिमित थे। आजकल ये आयाम बिस्तृत हो गये है। इस बहुआयामी कार्य के समय मे अपने को सही तरह से व्यवस्थित करना आवश्यक है।

सामान्य व्यवहार मे हम अपनी जानकारी आसपरोस के आधार पर बना लेते है। लकिन हमारा आंतरिक मन इसे स्वीकार करने के बाद दवाव मे रहता है। ये दवाव हमारे मन की बृति को बदल देता है। मन के बृति के अनुरुप कार्य योजना का नहीं बन पाना हमारी असफलता का कारण बनता है। कार्य योजना हमारी जानकारी के अनुरुप ही बनता है। जानकारी का बिस्तृत होना आवश्य है।

कैरियर कॉउन्सेलिंग करने का सम्बन्ध मन की बृति को सही कार्य दिशा देना होता है। इसके साथ ही सही व्यवस्था का बनना भी जरुरी है। उपलब्ध संसाधन मे अच्छा कर गुजरना ही कैरियर कांसेलिंग का लक्ष्य होता है।

सही दिशा मिलने के बाद कार्य आनन्द मिलता है। ग्रहण करने की क्षमता पुरे चरम पर रहती है। व्यक्ति मे जिज्ञासा बढ़ने लगती है। जिसका सही समाधान करने की क्षमता का विकाश होता है। जिससे मार्ग की सगुमता बढ़ जाती है। संभावना का समायोजन होता है। व्यक्ति पुर्ण जिवन का सही हकदार बनता है। उसको खुद से दोष नहीं होता।

यदि कोई ततकालिक समस्या है जिसका सम्बन्ध यदि हमारे व्यवस्था से है, तो उसका सामान्य निदान करके आगे की तरफ बढ़ना चाहिए न की वहीं अपनी जिवन दशा और दिशा दोनो बदल देना चाहिए।

दुर दृष्टि का होना हमारे संभावना को बढ़ता है। तनाव कम करता है। चिंतन को सवांरता है। मनन चलता रहता है। समायोजन होता रहता है। दिल को बिश्वास होता है। सफलता के प्रति उस्साहित बना रहता है। कैरियर काउन्सेलिंग में इन बातों का ख्याल रखा जाता है।

मुख्य तथ्यगत सुधारः-

  • दैहिक, दैविक, भौतिक, मानसिक, सामाजिक तथा व्यवस्था से होने वाले विकार का समुचित समाधान निकलना भी इसमें सामिल है।
  • एक लक्ष्य को तय करने के बाद बार-बार पिछे मुड़कर नहीं देखने के लिए कार्य योजना का संचालन की कला का बिन्यास का भी समायोजन किया जाता है।
  • सही कैरियर को खोजने के लिए आपके साथ आयी समस्या तथा उससे निपटने के लिए किये गये आपके प्रयास से निकलता है।
  • नयी बात को समझने के लिए टास्क देकर उसको समझा जाता है।
  • अभ्यास को नियत तथा नियमित करके भी समयबद्ध तरीके से असम्भव दिखने वाले लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
  • समीक्षा की भावना होनी चाहीए। ताकी आपकी संसय दुर हो सके।
  • प्रतिस्पर्धा को संचालन करने के लिए भी एक कार्य योजना होती है जिसका सम्बन्ध भी हमारे मानसिक बृति से होता है।
कैरियर कॉउन्सेलिंग के तथ्यगत सुधार हमें एक नियत व्यवस्था को स्थापित करता है। जिससे समय के अनुरुप हम अपने को ढ़ाल करे तथा उसका समुचित लाभ उठा सके। सम्पुर्ण योजना एक सफलता की गांरेंटी देने वाला यदी हो तो बिश्वास बढ़ जाता है। इसका यहां वर्णन किया गया है।
कैरियर कॉउन्सेलिंग के तथ्यगत सुधार

कैरियर कॉउन्सेलिंग से लाभः-

  • समय के साथ सफलता
  • कार्य से आनन्द
  • धन तथा समय का बचत
  • जिवन आनन्द का संचार
  • संयोग के प्रबन्धन काला का बिकाश
  • स्वयं के बिश्वास मे उन्नति
  • कार्य कौशल का बिकाश
  • समग्र उत्कर्ष
  • व्यक्तित्व का विकाश
कैरियर कॉउन्सेलिंग से लाभ को समझकर हमे इसके प्रती सुनियोजित व्यवस्था बनकार उसका लाभ उठा सकते है। उचित व्यवस्था के अभाव मे हम इसकी जानकारी रखते हुुए भी इसके लाभ से वंचित रह जायेंगे।
कैरियर कॉउन्सेलिंग से लाभ

कैरियर कॉउन्सेलिंग का न होनाः-

  • परिवारिक दबाब में निर्णय
  • प्रतिबद्ता के साथ कार्य
  • कार्य कुशलता मे कमी
  • कार्य दवाव का एहसास
  • व्यकतित्व मे निखार
  • संयोग-वियोग का धमासान
  • खुद से परेशान
कैरियर कॉउन्सेलिंग का सामाजिक आधार व्य़क्तिगत जानकारी तक सिमित रहता है। हम उपलब्ध संसाधन के साथ व्यक्ति के सनायोजित कर देते है जो समय के साथ अपना भला नही कर पात है। उसे जो मिलता है उसमे वह बिशिष्टता को नही प्राप्त कर पाता है। इसकी एक झलक इसमे दिया गया है।
कैरियर कॉउन्सेलिंग का सामाजिक व्यवस्था

उदाहरणः-

चिकित्सा बिज्ञान से कम्प्यूटर बिज्ञान मे स्थानांतरण

राजकुमार जी का परिवारिक पृष्ठभुमि चिकित्सा बिज्ञान का रहा है। इसलिए इंटर के बाद प्रतियोगिता की तैयारी मे चिकित्सा बिज्ञान मे जाने के लिए करने का बिचार परिवारीक रुप से दिया गया। क्योकिं इस व्यवसाय से जुड़ी सारी जानकारी उनके परिवार को था। उन्होने ऐसा किया लेकिन सफलता हाथ नही लगा। इसी दैरान मैने पाया की उसका झुकाव कम्प्यूटर के तरफ ज्यादा है उसके सिखने की झमता उसके सहपाठी से कई गुणा ज्यादा है। साथ ही उसका ठहराव भी अधिक है। नविनतम जानकारी को आसानी से हासिल कर ले रहा था। जबकि उसके साथी सिर्फ अपनी सामान्य जानकारी तक ही सिमित था। इसलिए उसके कैरियर को कमप्यूटर साइंस कर दिया गया। उन्होने इसमे एम. सी. ए की उपाधी प्राप्त की। इसके बाद आज एक सफल कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर व्यवसाय के रुप स्थापित है।

उदाहरण 2

चिकित्सा से प्रोफेसर

शालु को चिकित्सा बिज्ञान में अभिरुची थी लेकिन परिवारिक आर्थिक कमजोरी होने के कारण यह संभव नहीं था। उनको एक लम्बी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ना भी संभव नही हो पा रहा था। इसलिए इसे बॉटनी से आगे बढ़ने का विचार संपादित किया गया। उसको पौधो मे भी अभिरुची थी। आज उसका एकेडमिक रिकॉर्ड अच्छा है जो समय के साथ अपने सोपान की तरफ आगे बढ़ रहा है।

उदाहरणःः3

एकेडिमिक शेसन पुरा नही हो पाया

त्रिवेदी जी का चिकित्सा बिज्ञान की पिरवारिक पुष्ठभुमि को अपना कर आगे बढ़े लेकिन उनकी अभिरुची की कमी के कारण अपना कैरियर बिच मे ही छोड़कर अपने सामान्य जिवन में व्यवस्थित हो गये।

उदाहरणःः4

मैथ पढ़ने से सर दर्द

रमेश जी को मैथ पढ़ने से सर दर्द की सिकायत हुआ जब वह मैट्रिक पास कर गये। इसलिए उन्होने आगे की तैयारी छोर दि। इसके बाद उनके एक व्यवसायिक कोर्श मे एडमिसन करा दिया गया। जिसको पढ़ने के साथ-साथ अभ्यास भी करना था। जिसके कारण उनका मन लगने लगा तथा आज एक सफल व्यवसायी है।

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