दोस्ती का दर्पण कविता

Dosti ke Darpan

Dosti poem

दोस्त और दोस्ती हमारे जिवन यात्रा का साथी है। हम कहीं न कहीं अनजानापन महसुस करते है। वहां जो हमे सराहना मिलता है, उसे हम दोस्ती की संज्ञा देते है। समय के साथ परिवर्तन वाला यह रिस्ता यादगार रहता है। दोस्ती के कई आयाम है, लेकिन नाम एक है। निहित स्वार्थ से दोस्ती होती है, और निस्वार्थ से भी। दोस्ती करने वाला की भावना प्रधान यह रिस्ता अपना गाथा खुद गाता है। कुछ दोस्ती ऐसी जो इतिहासिक है। जिसका उपमा हम आज भी देते है।

      दोस्त ऐसा मिले जो आपके बिचार का हो तो अच्छा चलता है। लम्बे समय तक बिचार का आदान-प्रदान होता रहता है। एक दुसरे के दर्द को समझने तथा समझाने का एक मौका मिलता है। समय के साथ आगे भी निकलता है। दोस्त से अच्छा मार्गदर्शक किसी को नही माना गया है। निःस्वार्थ बिचारवान दोस्त कहते है, किस्मत वालो को मिलता है। जिसने दिस्ती निभा दी, उसकी मिशाल भी दी जाती है।

 आज राष्ट्र को एक ऐसे दोस्त की जरुरत है, जो बिश्वास के साथ-साथ हमारा भी साथ दे। हमारा संकल्प हमारी राष्ट्रीय शक्ति बनकर उभर रहा है। एक संदेश हमारे राष्ट्रीये बिचार का जो फैला है, उसे कई हाथ दिस्ती के मिले है। तृतीये विश्व युद्ध के इस दौर मे दोस्ती एक प्रमुख भुमिका निभा रहा है। जैविक बम का मुकाबला करने के लिए कई राष्ट्र आगे आकर मुकाबला कर रहे है।

   आज का हमारा लेख जन जिवन को सबारता सराहता हुआ एक संदेश है, जो हमारी दोस्ती की उर्जा शक्ति को गुणित करता रहे। अनंत आकाश तक बिचरने वाला यह संदेश युग-युग तक बिचरता रहे तथा जन मानस को स्पंदित करे इस बिश्वास के साथ हम यह कविता आप तक पहुँचा रहे है। जय हिन्द

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