Opportunity and time QA

Q. अवसर और वक्त बार-बार दरवाजा खटखटाता है, यदि सोने वाले गहरी निंद में हो तो उसे कौन जगाता है।

  1. दुर्घटना,
  2. चेतना
  3. भगवान
  4. दोस्त
  5. कोशिश करना बेकार है।

उत्तर व्याख्याः-

अवसर हमेशा वक्त के साथ जुड़ा रहता है। वक्त निकलने पर अवसर की महत्ता समाप्त हो जाती है। अवसर एक जरुरत है, जिसको तलास रहता है, जरुरत मंदों का जिससे की उसका समायोजन समय से किया जा सके। जो जरुरत मंद संबेदनशील होता है, वह उसे प्राप्त कर लेता है। यहीं पर कुछ लोग पिछे छुट जाते है। कारण कई है, लिकिन सभी कारण को प्रश्न मे सोने के शब्द से निरुपण किया गया है। गहरी निंद से तातर्य है, अवसर के प्रति संवेदनहीनता या उसके प्रति पुरी तरह से निराशा। जानकारी है, करना चाहिये जानने के बावजुद व्यक्ति को कार्य संपादन के प्रति रुचि का आभाव होता है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है, कि अवसर का प्रभाव उसके ऊपर कम है, या कोई दुसरा कारण है, जो उसके उत्साह को कम कर दिया है। यदि समय के साथ उसका प्रभावी कारक हट जायेगा तो, वह फिर जरुरमंद की सुची मे आ जायेगा। यह कार्य उसको अचानक तब होता है, जब उसको आवस्यकता जान पड़ती है, लेकिन उसका संबन्ध कार्य संपादन के लिंक से हट जाने से कार्य नहीं हो पाता है। फलतः उसे निराश हाथ लगती है। 

लगभग 40 लोगों को यह प्रश्न भेजा गया था। जिसमे से 16 का जबाव था- चेतना. 3 का जबाब था कोशिश करना बेकार है, तथा 1 का जबाव था दुर्धटना। कई का जबाव नही आया। कई ने कहा निर्णय करना कठीन है। बांकी तीन उत्तर पर किसी ने अपना मत नहीं दिया।

दुर्घटनाः- यह व्यक्ति को जगाता है। यद्दपि व्यक्ति को उस समस्या से सामना करना पड़ता है, जो उसके दिमाग मे तो है, पर व्यहार मे नही है। वह पुरी ताकत के साथ उसका मुकाबला करता है। फिर वह अपने जरुरत को सही करने के लिए सहयोग का तलास करता है। जबकि वक्त के साथ अवसर निकल गया होता है। आज के समस्या का समाधान तो उस समय था, जब अवसर आया था, आज के सामधान के लिये।

चेतनाः- यह एक अवस्था है। इसकी भी तीन अवस्था होती है। इस अवस्था मे व्यक्ति कार्य के प्रति निष्ठावान तो रहता है, लेकिन उसका चुनाव उसे अपने कार्य प्रमुखता के सुची से करना होता है। जिसका निर्धारण उसका जरुरत उसे कराता है। जिसकी जरुरत उसको भविष्य मे होना है, उसे वर्तमान से सिचने की कला अवसर को पकड़ना कहलाता है। जो उसमे नही है, क्योकि वर्तमान जरुरत की गहराई किसी कारण बस उसे बहुत जरुरी मालुम नही पड़ता है।

भगवानः- भगवान की प्राप्ति भी व्यक्ति को भविष्य की समस्या के लिये पहले से तैयार करता है ताकि वह अवसर को पकड़ सके। यदि चुक हो जाये, तो वह उसकी भरपाई के कला को जान सके। उसका कार्य जगाने का नही लायक बनाने का होता है। जो साधना के मार्ग से निकलकर व्यक्ति को हासिल होता है। व्यक्ति उस गुण को हासिल कर लेता है जो उसके पास जन्मजात नही था। यही भगवान को पाना कहलाता है, जिसके कारण वह अवसर तथा वक्त दोने का समायोजन सिख जाता है।

दोस्तः- दोस्त उसे समझाने की कोशिश कर सकता है, उसके अंदर की प्रकाष्ठा को निखार नहीं सकता। दवाव देने की एक सीमा होती है। वह कार्य के लिए प्रेरणा देता है, लिकिन उसके सही स्थान देना भी जरुरत मंद को ही होता है। कभी ऐसा होता है, व्यक्ति कार्य तो करता है, लिकिन शिथिल होकर छोड़ देता है। दुर्धटना उसके मसतिष्क के उस भाग को जगा देता है, जहां से उसको उस कार्य के प्रति चेतना जगृत हो जाता है, और वह यथेष्ठ हो जाता है। अवसर तथा बक्त को समझ लेता है।

कोशिश करना बेकार हैः- यह हो सकता है, कि तब जब हमें प्रयत्न करने की सीमा दी गई हो, लेकिन यहां यह सीमा नहीं है। कहा गया है कि कौन जगाता है, यानि जगाने वाला कारक इतना ताकतवर होना चाहिये कि वह उसे जगाके ही दम लेगा। यह ताकत दुर्धटना मे होता है। वह उसे रुलाता है, पुरे प्रक्रिया की समीक्षा करवाता है, तथा आगे के प्रति उसको सवधान भी करता है। चेतना को जगाता है।

लेखक एवं प्रेषकः- अमर नाथ साहु