पहला सोमबारी कविता

Pahala Sombari

Bhakti poem

यह बिशेष पर्व सावन की शुरुआत के साथ शुरु होता है। सावन के समय होने वाले मौसम मे बदलाव के कारण शारीरको व्यवस्थित करने के लिए यह पर्व बड़ा ही उत्तम है। दिनभर के उपवास के वाद शायं काल फलाहार लेने की छुट है इसके पश्चात रातभर निर्जला का पर्व रहता है। सुवह की सुर्य की किरणों के साथ भोजन की व्यवस्था का प्रावधान है। पहला सोमवारी मे बिशेष तैयारी की जरुरत होती है। मन को संतुलित व्यवस्थित करने के बिचार का अगमन पहले से रहता है। दैनिक जिवन की भागमभाग को संतुलित करने की जरुरत होती है। ऐसा होता भी है क्योकि पर्व की व्यवस्था के साथ रहने से गुणता का आगमन स्वतः हो जाता है। आसपरोस का माहौल भी हमें प्रेरित करता है। बन्धु-बांधव का सहयोग भी मिलता है। एक स्वतः स्फुर्त मन काम करने लगता है। देव स्थल की सजावट भी मन मे प्रेरणा को जगाता है।

इससे अलग भी भगवान भोले नाथ की आराधना का भाव तथा प्रभाव दोनो की प्रधानता रहती है। मन एक उच्चश्रिख बिचार से ओतपोत रहता है। भक्ति रस का समावेश मन को भक्ति मय कर देता है। कई लोग पहला तथा अंतिम सोमबारी करके अपने आराध्य को खुश कर लेते है। जबकि अधिकांश लोग सभी सोमबारी करते है। मन को एकाग्रचित करने का एक उत्तम मार्ग है। हमें यह अवसर हर साल मिलता है। हमारे मन मे एक बिचार शक्ति चलती रहती है। भक्त भगवान के मनोभाव को मिलने का एक उत्तम समय है। प्रकृति तथा समाज दोनो का साथ हमे इस समय मिलता है।

भक्त जन आज के समय का बिस्तार से बर्णन करने का नही है बल्कि यथाशक्ति भक्ति को बनाने तथा भगवत्व प्राप्ती का है। आपका दिन शुभ हो आप हमेशा नबोधविध बिचारो से ओतपोत रहे। अपका मनोरथ पुर्ण हो। आप हमेशा जागृत रहे। कल्याणकारी भाव आपके मन मे प्रस्फुटित होता रहे। इसी भावना के साथ हम आपके अच्छे भविश्य की कामना करते हुए आज की गति को बिराम देते है। जय शिव

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लेखक एवं प्रेषकः- अमर नाथ साहु

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