श्रधेय बिदाई

Shradhei Vidai

poem

श्रधेय बिदाई

हमारा नित्य प्रति लोगो से मिलने जुलने का कार्य चलता रहता है ऐसे मे कुछ ऐसे लोग होते है जो अपना एक प्रभाव छोड़ जाते है जो हमे कार्य उन्मुख होते समय उनकी याद करते है। ऐसे लोगो के प्रति हमारा भाव एक बिचार बनकर हमारे अंदर रह जाता है। इन्ही बिचारो की ऐक कड़ी हम यहां भेंट कर रहे है।

SBI LIFE के कंकड़बाग ब्रांच से कार्य मुक्त हो चुके महेश जी की बिदाई का काव्य भेंट। कार्य के प्रति लगाव की गाथा को बताना सुनाकर एक दुसरो को प्रोत्साहन करने की बात सतत चलती रहती है इसी की कड़ी का एक काव्य रुप भेंट है।

क्रर्य उत्साह बनी रहे इसलीए लोगो से बराबर बातचीत करने की व्यसायिक कला के अलावा भी लोगो का अपना एक व्यक्तित्व होता है जो हमे एक दुसरे से जोड़ देता है जिसकी चर्चा हम एक दुसरे से करते है यदि वह काव्य रुप बनकर सबके सामने आ जाय तो हमे एक अत्यन्त ही सुखद ऐहसास देता है। जय हिन्द

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