

ममी का बर्थ डे
बर्थ डे मनाने की परंपरा बिदेशी होने के साथ ही इसकी व्यवस्था भी बिदेशी ही है। हिन्दुस्तान मे गुजर चुके लोगो से कुछ सिखने की व्यवस्था है जिसको हम याद करते है तथा जिसकी वर्षी हर साल हमलोग मनाते है। समय के साथ होने वाले परिवर्तन के प्रती हम सहज बनते जा रहे है। सधारणतया युवा को इसके प्रति ज्यादा रुची रहती है। स्वयं की महीमा मंडित करने की प्रथा समाज मे स्वयं के प्रती के भाव को बढ़ावा देता है। ऐसा देखने को मिलता भी है कि आज का समाज व्यक्ति केद्रित होता जा रहा है। समाज के प्रति हमारे जिम्मेदारी मे कमी देखने को मिल रहा है। इसे पुनः व्यवस्थित करने की जरुरत है। समय के साथ इसे हमे अपने परिवेश के अनुकुल ढ़ालना पड़ेगा जिससे हमारा युवा वर्ग को सही मार्गदर्शन मिल सके। मम्मी के वर्थडे पर बच्चो मे बहुत बड़ी खुशी रहती है। बच्चो को समझने तथा कुछ सिखने का मौका मिल जाता है। मां से लगाव होने के कारण इसका प्रभाव और ज्यादा हो जाता है। समय-समय पर होने वाले कार्यक्रम बच्चों मे व्यवस्था को बनाने तथा आपसी सामनजस्य बनाने का गुड़ तो सिखाता है ही साथ ही जिम्मेदारी का एहसास भी करवाता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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