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वक्त का मुसाफिर

वक्त का मुसाफिर

Wakt ka Musaphir वक्त के मुसाफिर वैज्ञानिक आधार जब कोई व्यक्ति समय के साथ आगे बढ़ता है तो उसके ऊपर बहुत सारे कारक एक साथ कार्य करतें है। यदि कार्य करने वाले को इस कारक का ज्ञान नही है और उसे आगे जाना है तो वह मुसाफिर बन जाता है। यानि समय के साथ आने वाले परिवर्तन को वह अपने कार्य क्षमता और समझ बुझ के साथ हल करते हुए आगे बढ़ेगा। उसका उदेश्य पुरा होगा या नही उस व्यक्ति को मालूम नही है क्योकि पहले से कुछ ज्ञात नही है। इसके लिए उस व्यक्ति के द्वारा किया गया प्रयास…
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भोगवादी समाज का दर्द

भोगवादी समाज का दर्द

भोगवादी समाज का दर्द विज्ञान ने हमारे सोंच के मूल अवधारणा को बदल दिया है, जिसके कारण हमारी सोच भौतिकतावादी होकर रह गई है। इसी भौतिकतावादी सोंच के कारण हमारे अंदर भगवान के द्वारा गलत करने पर दंड देने की सोंच मे परिवर्तन आ गया है जिसके कारण आज समाज का परिदृष्य बदल गया है। अपराध करने वाले को व्यवस्था का डर होता है जबकि पहले भगवान का भी डर होता था। आज भी कुछ ऐसे लोग है जो भगवान की प्रभुसत्ता को स्वीकारते है और उसके अनुरुप आचरण भी करते है जससे समाज के अंदर गुणता बनी हुई है।…
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जीत की समझ

जीत की समझ

जीत की समझ ब्राह्य आवरण से प्रभावित हुए बिना जो वास्तविकता को समझ जाए है उनके जीत की समझ अच्छी मानी जाती है। कयोंकि सत्य को जानने के लिए व्यक्ति को सतत प्रयास करते हुए आगे बढ़ना होता है। भावना के आगोश में बहने वाले जब सुख की खोज करते है तो वह ब्राह्य आवरण में उलझकर सत्य से दूर चले जाते है।
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लहरों की कहानी

लहरों की कहानी

Laharon ki kahani लहरों की कहानी सागर अपनी विशाल जलराशि के कारण शांत बना रहता है। जबकी हवा का झोंका पानी के सतह से जब टकराकर आगे बढ़ती है तो अपने साथ सागर के सतह के पानी को गतिमान कर देती है जिससे सागर मे लहरें बनने लगती है। यह लहरें हवा के झोंकों के साथ आगे बढ़ती जाती है और एक बड़ी लहरें बनकर सागर के तट से टकराती है। लेखक का कहना है कि जो सतह का पानी हवा के संपर्क मे था ओ हवा के साथ चलने लगी लेकिन हवा आगे निकल गई और लहरें की पानी…
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जीत का घोड़ा

जीत का घोड़ा

जीत का घोड़ा जीत के घोड़ा दौराने वाले का चिंतन मनन विशिष्ट होता है। उसका हर कार्य उसके संकल्प की दिशा से निर्दिष्ट होता है। जिससे वह पल की पल को सहेजता हुआ आगे बढ़ता है। हर कदम पर आने वाली बाधाओं का समाधान करता हुआ वह आगे बढ़ता जाता है। जिससे उसका हौसला बुलन्द होता जाता है। जिससे उसके कार्य उर्जा का स्तर भी लगातार उँचा बना रहता है। उसके शारीरिक मानडंड से लेकर सारे क्रिया-कलाप उसके अपने नियंत्रण मे होते है। इसलिए स्वयं आंकलन उसके द्वारा लगातार किया जाता है। वह अपने मन को खुली छुट नही देता…
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प्राकृतिक रिश्ते

प्राकृतिक रिश्ते

प्राकृतिक रिस्ते प्राकृति मे होने वाले उथल पुथल से हम प्रभावित हए बिना नही रह सकते है। हमें इसका ध्यान रखना परता है। जितना ही अधिक जानकारी हम इसका रखते है उतना ही हम सुखी रह सकते है। हमारे चारो ओर प्रकृति प्रदत वस्तु मौजुद है। यहां तक की हम भी प्रकृति के ही अधिन है और वातावरण के साथ लगातार संयोजित होते रहते है। प्रकृति के साथ हमारा सबंध प्यार का है यानी की हमारी जीवन और जीवन से जुड़ी सारी खुशी के लिए हम इसपर ही निर्भर करते है। जो लोक प्राकृतिक आवास और मौसम के बिच रहते…
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बिंदास पल

बिंदास पल

बिंदास पल मन बड़ा ही चंचल और स्वछंद होता है। वह हमारे आसपास घटित होने वाली घटना के अत्यंत बारीक बदलाव से भी प्रभावित हो जाता है। उस भाव को आत्मसात करना या छोड़ना हमारे वर्तमान परिस्थिती के हमारे अनुवंध पर निर्भर करता है। लगातार हो रही इस प्रकार की घटना से हमारे अंदर एक नाकारात्मक बिचार की द्वंध बढ़ने लगता है जिसके कारण हमारे निर्णय की शक्ति प्रभावित होने लगती है और तनाव के शुरुआती भाव हमारे ऊपर दिखने लगता है। इस भाव से निजात पाने के लिए हमें एक युक्ती से गुजरना होता है जिसके बाद हमारे भाव…
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सम्मान का दर्द

सम्मान का दर्द

सम्मान का दर्द भरोसे की जिन्दगी में जो सम्मान लोगो से मिलता है यह सोचने का समय ही देता है कि यदि यह भरोसा टुट जाय तो क्या होगा। खुश रहने की हमारी हमारी प्रबृती हमें बिषम परिस्थिती के बारे मे सोचने से रोकती है क्योकि उस परिस्थिती की जानकारी के बाद हमारी जागृत चेतना हमे उस घडी का सामना करने के लिए तैयार कर देती है जो खुश रहने के समय के लिए सही नही है। लोग कहते दिख भी जाते है समय आयेगा तो देख लेंगे।  एक दिन भरोसा अचानक टुट गया अब स्वयं की गुणकारी भाव के…
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बिंदास भोला

बिंदास भोला

बिंदास भोला अपने सिमित साधन के साथ नवाचार होते हुए खुश रहने वाले भोला को लोभी, भोगी और मानसिक रोगी वाले से चिढ़ बढ़ती है। वह इन लोगो के करीब नही आना चाहता है। लेकिन प्रकृति मे निरंतर घटनाक्रम चलते रहता है हम अपने स्वभाव के अनुरुप ही उसका प्रतिकार करते है तथा उसके फलाफल को प्राप्त कर अपनी जीवन यात्रा पर आगे निकल जाते है।    भोला चाहता है कि संसार के सभी प्राणी बिंदास होकर जीवन यापन करे। कोई किसी की आंतरीक सीमा मे जाकर क्यो उसके बिंदास जीवन पर जबरन अधिकार प्रत्योरोपित करे। इस व्यवस्था का बिरोध…
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दृढ़ता से नैतिक विकास

दृढ़ता से नैतिक विकास

नैतिक विकास के लिए हमें सतत प्रयास की जरूरत होती है। हमे अपने लिए एक व्यवस्था विकसित करनी होती है। जिसका अभ्यस्त होना होता है तथा समय के साथ नवीन विचार से भी खुद को जोड़ना होता है। फिर विकाश की प्रक्रिया समय से साथ चलने लगती है। संकल्प शक्ति का प्रयोग करते हुए बेहतर प्रवंधन के सहारे ही हम विकास की धारा को बनाये रख सकते है। खुद पे बिश्वास होना भी वहुत जरुरी होता है इसके लिए हर जरुरी तथ्य को जोड़कर आगे ले जाना होता है। उच्च कार्य उर्जा वाले के लिए कार्य को करना आसान होता…
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