जुड़सीतल

जुड़सीतल

जुड़सीतल     बिहार के मिथिला मे प्रचलित जुड़सीतल पर्व बहुत पुराने समय से मनाया जाने वाला महत्वपुर्ण त्योहार है। ग्राम्य जीवन से जुड़े लोग मिट्टी को जुड़ाव को दर्शाते है। इस दिन एक दुसरे को गिली मिट्टी लगाते है और खुशी मानाते है। संयुक्त परिवार की चली आ रही परंपरा मे कुछ लोग ऐसे होते थे जो मिट्टी का कार्य से दुर रहते थे लेकिन पुरी गतिविधी मिट्टी से जुड़े कार्य की ही करते थे। इसलिए आपसी सौहार्दय को बनाने और समरसता लाने के लिए इस अनोखी परंपरा की शुरुआत की गई। ग्राम्य जीवन मे कृर्षि कार्य को करने वाले…
Read More
बाबा साहेव भीमराव अम्बेदकर

बाबा साहेव भीमराव अम्बेदकर

बाबा साहेव भीवराव अम्बेदकर   बाबा साहेव भीव राव अम्बेदकर जी का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के महु मे हुआ था। वे अपने माता पिता के 14 वें संतान थे। बचपन से ही उन्होने सामाजिक तान-वाना को करीव से देखा। समाज मे छुआछुत की व्यवस्था उस समय चरम पर थी। उन्होने अपने कार्य क्षमता को बढ़ाया और उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होने कोलंबिया और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स दोनो ही विश्वविध्यालय से इकोनॉमिक्स मे डॉक्ट्रीयट की उपाधी प्राप्त की। उन्होने विधी शास्त्र पर शोध भी किया।    भारत के संविधान के प्रारुप समिति के अध्यक्ष बने। वे स्वतंत्र भारत…
Read More

वरदान का महत्व

वरदान का महत्व भक्त और भगवान का बड़ा ही अनुठा संबंध होता है। भक्त भगवान के प्रति जितना आसक्त होता है भगवान के वो उतने ही करीव होता है। उसकी भक्ती उसको इस लायक बना देती है की वो हर परिवर्तन का मिल्यांकन कर सकता है। अपने इस गुण के कारण उसकी समझ अच्छी हो जाती है। वर्तमान जीवन के कठीन पल को वो आसानी से समझते हुए वो आगे निकलता चला जाता है। उसकी ये समझ उसको संतुष्टी देती है।    भक्ति के एक पराव पर भक्त और भगवान का प्रतक्षिकण होता है जिसमे भक्त भगवान को अपनी दृष्टि…
Read More
एक फूल की भेंट

एक फूल की भेंट

एक फूल की भेंट   सुखद वैवाहिक जीवन के हसीन सपनो को सजाता हुआ जीवन आगे चलता जाता है। इसमे संभावनाओं के मोती जड़े होते है। इस संभावनाओ को हम अपने कार्य क्षमता और उम्मीद के सहारे सिंचते चले जाते है। जबकी प्राकृतिक रुप से वास्तविकता कुछ और ही होती है, क्योकि परिस्थिती लगातार बदलती रहती है। हमको इस बदलाव को ख्याल करके अपने कार्य को समझना और समझाना होता है। यहीं से जीवन को जीने की सच्ची अनुभूती की शुरुआता होती है। यही गुण बड़ा होकर व्यक्ति को गुणत्मक रुप मे स्थापित करता है। ऐसी ही एक कहानी का…
Read More
महावीर जयंती

महावीर जयंती

महावीर जयंती   छठी सताब्दी ईसा पुर्व भगवान महावीर का जन्म हुआ था। इस समय छोटे-छोटे जनपद मे देश बटा हुआ था। इसी समय मगध जैसे गणराज्य का उदय हुआ। आपस मे समुदाय एक दुसरे से उलझे रहते थे। जिससे लोगो मे निराशा का वादल उमड़ने लगे थे। लोहा के व्यापक अपयोग के बाद एक बडे बदलाव की ओर लोग अग्रसर हो रहे थे। इसकी समय भगवान महावीर का आगमन हुआ। बिहार के बैशाली के निकट कुण्डलपुर ग्राम में चैत्र शुक्ल पक्ष त्र्योदशी तिथि को उनका जन्म हुआ था।   30 बर्ष की आयु मे भगबान महाबीर ने घर-बार छोड़कर…
Read More
मजबूरी

मजबूरी

मजबूरी मजबूरी     जरुरत और व्यवस्था में समानजस्य नही होने से समस्या उतपन्न हो जाती है। यदि व्यवस्था को सही करने की हमारी कार्य क्षमता नहीं है या इसमें समय लग सकता है तो हम ततकाल अपनी जरुरत को पुरा करने के लिए जिस मार्ग का अनुसरण करते है और वो हमारी सोच मे नही है तो हम इसे मजबूरी की संज्ञा देते है। हम कार्य कर तो रहे है लेकिन मजबुरी में यानी इसम हमारी व्यवस्थित सोच जैसी उत्साह नही रहती है। इसके फलस्वरुप समय के साथ जो व्यवस्था बनती है उसमे हमारी आदत बन जाती है और हम…
Read More
शहीद दिवस

शहीद दिवस

शहीद दिवस शौर्य और विरता की कहानी सुनकर मन उत्वेलित और उत्साहित हो जाता है। मन मे उत्पन्न होने वाला उदगार हमारे जीवन को अर्थपुर्ण बनाने के लिए हमें प्रेरित करता है। यह प्रेरणा हमे जीवन के उच्चता के भाव को सहजता से स्वीकारने के लिए हमे सहज बनाता है। यह सहजता ही हमें जीवन को परिभाषित करने मे हमारी मदद करता है। हमारा आत्मबल हमारी ताकत बनकर हमे आगे बढ़ने के लिए हमारा मार्गदर्शन करता है। सकारात्मक विचार की ओर बढ़ता हमारा कदम हमें मजबुत बनाता है। यही मजबुती राष्ट निर्माण मे अग्रणी भुमिका निभाता है।     शहीद दिवस…
Read More
Marriage Anniversary

Marriage Anniversary

Oplus_131072 शादी की पहली सालगीरह गृहस्थाश्रम जीवन की शुरुआत शादी से ही होती है। परिवारीक जीवन के अनमोल मोती इसमे पिरोये रहते है। जीवन के हर विधा को यहां संयमित और नियंत्रित किया जाता है। कहा जाता है कि एक संपुर्ण जीवन जीने के लिए वैवाहिक जीवन जरुरी है। वैवाहिक जीवन एक वंधन होता है जिसकी चुनौतियो को साधते हुए एक कुशल जीवनयापन से जो समाजिक आदर्श स्थापित होता है उससे अधिक मुल्यावान किसी और को नही माना जाता है।    इस मुल्यावान जीवन के कई स्तम्भ है जिसको की सही तरह से समझते हुए जीवन मे आगे बढ़ना होता…
Read More
Atmhatya ki prabriti

Atmhatya ki prabriti

Oplus_0 आत्महत्या की प्रवृति     आधुनिक समय मे जीवन की चुनौतियां बढ़ी है जिससे आगे बढ़ने के लिए लगातार सार्थक प्रयास की जरुरत होती है। पर इतना ही काफी नही है इसके अलावा भी उच्च कोटी के प्रयास की जरुरत होती है जिससे की प्रतियोगिता मे आगे निकल सके। सफलता के मानडंड को पुरा करने के लिए इस तरह के प्रयास को शुरु से ही ध्यान देना होता है जिससे की लक्ष्य को समय से साधा जा सके।    जीवन की इस आपधापी मे होने वाले तनाव को झेलने के लिए सामर्थवान होना जरुरी है। इसमे किसी भी प्रकार की कमी…
Read More
न्याय की देवी

न्याय की देवी

न्याय की देवी Oplus_0    न्याय सबको सहज और आसानी से प्राप्त हो जिससे समाज के अंदर विश्वास के साथ समरसता का भाव को जागृत किया जा सके। जिससे सत्य और निष्ठा को स्थापित किया जा सके। भारत एक विशाल देश है इसमे समाज के विभिन्न वर्ग के लोग विभिन्न प्रकार के वेशुभुषा, भाषा, रहन सहन के साथ रहते है। इसके विच होने वाली आपसी तनाव और समस्या के निदान के लिए एक उच्च स्तर के न्यायिक व्यवस्था की जरुरत होती है। इसी व्यवस्था को बनाये रखने के लिए न्याय के प्रतिक को स्थापित किया जाता है। इसमे न्याय होने…
Read More
error: Content is protected !!