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जीत के राही

जीत के राही

Jit ke rahi Jit ke rahi जीत के राही जीत यदी जीवन के कार्यशौली का हिस्सा बन जाय तो समझना होता है कि व्यक्ति को कार्य करने का नजरीया बदल गया है। वह कार्य को जीत के हिसाव से देखता है और स्वयं को उसी तरह से व्यवहार भी करता है। जीत की खुशी सारे खुशी पर भारी परती है। जीतने वाला व्यक्ति का बतचीत और समय प्रवंधन सटीक होता है। उसे पता होता है कि वह क्या, क्यो और कैसे  कर रहा है। उसकी पैनी नजर कार्य के प्रगती पर रहती है। समय के साथ कार्य मे बदलाव की…
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इंतजारी की उदासी

इंतजारी की उदासी

इंतजार की उदासी इंतजार हमे बहुत कुछ सीखा देती है क्योकी किसी कार्य को होने के लिए उसका अपना एक समय होता है और हमें उससे जुड़ने के लिए इंतजार करना परता है। लेकिन कभी-कभी ये इंतजार काफी लम्बी हो जाती है जो हमारे सोच के दायरे मे नही आता है। इसका कारण हमें सिमित दायरे मे रहकर सोचना से जुड़ा होता है। हमारी अपेक्षा इतनी बढ़ जाती है कि हम ज्यादा गहरा सोचना ही नही चाहते है क्योकी इससे होने वाले परिणाम को हम स्वीकार नही कर सकते है। संभावना के साथ होने वाले परिवर्तन के लिए यदि हम…
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संतुष्टि और सहयोग

संतुष्टि और सहयोग

संतुष्टि और सहयोग संतुष्टी हमें विकाश की सीमा मे हमे वांधकर आगे बढ़ने मे मदद करता है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जो समय के साथ बिकल्प को तलाशते हुए सहयोग लेकर आगे निकल जाते है। उसके दिमाग मे आगे निकलने की उत्कृष्ट आकांक्षा रहती है जिसके कारण सार्थक गुण के विकास मे समय गवाने को छोड़कर वह बिकल्प को अपनाते हुए आगे निकल जाते है। सहयोग करने वाले के पास सहयोग के रुप मे मिलने वाला सराहना होता है नही मिलने पर उलहना होता है वह सहयोग नही करने वाले की प्रतिष्ठा को कम करने का प्रयास करते…
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आशा की किरण

आशा की किरण

आशा के किरण जिन्दगी मे आगे बढ़ने के लिए आशा शब्द का बड़ा ही महत्व होता है। गुणकारी व्यक्ति को यदि आशा की किरण दिख जाय तो ओ संभावना के प्रती अपने आशा को आश्वस्त करने मे जुट जाते है। समय के साथ सकारात्मक परिवर्तन आशा को मजबुती देने लगता है। कार्य के प्रति मानसिक दृढ़ता बढ़ने लगती है। चर्चा के बिषय मे इस बातों की प्रधानता बढ़ने लगती है जिससे की सही जानकारी को जुटाते हुए कार्य के प्रति लगाव को गहराई मिलता रहे।         कुछ नया करने का जजबा रखने बाले लोग इस गुण के धनी होते है,…
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सुशासन बाबू

सुशासन बाबू

राजनिति सामाजिक परिवर्तन का आईना होता है जिसमे हमे समाज की परिवर्तन की दिशा का ज्ञान होता है। गतिशिलता जीवन की धारा है जिससे हमारी आत्मा को शक्ति मिलती है वही पर स्थिरता हमारा स्वभाव है जिसमे शरीर को आनन्द मिलता है। इस दोनो भाव को समस्त रुप को एक साथ क्रियांवित होते हुए यहां हम देख सकते है। सुशासन की बात तब होती है जब समाज मे स्थिरता की स्थिति बिगड़ जाती है। इसके बिगड़ने का कारण हमारा स्वार्थ पुर्ण व्यहार होता है, जिससे समाज मे ध्रवीकरण को बल मिलता है। भाव पुर्ण बिरोध बिकाश को प्रदर्शित करती है…
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निराशा की आग

निराशा की आग

निराशा की आग लॆख जीवन भी एक अजीव पहेली है। उम्मीदों का दामन थामे जब जिंदगी आगे बढ़ती रहती है तो फुर्सत कहां मिलता है कि इसके बिच किसी अनहोनी के बारे मे सोचें। आजकल का तो समय ही है कि अति क्षिण संभावना भी दिखे तो अपनी निगाहें जमाये रखो यानी सकारात्मक सोच को बनाये रखो। एक भौतिकतावादी मानव के मन के लिए यही सबसे बड़ी समस्या होती है कि उसे थोडी भी कष्ट की बात को सोचना पड़े तो वह अपना मुह मोड़ लेता है और जब अनहोनी होती है तो उसके लिए खुद को संभलना मुश्किल हो…
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वक्त का आईना

वक्त का आईना

वक्त का आईना वक्त के आईना मे खुद को निरखना एक कला है अपने अंदर की ओर झांकने का कार्य ऋषि मुनी करते है, जिससे की उनका आत्म दर्शन हो जाता है। लेकिन व्यवहारिक मनुष्य के लिए ऐसा कर पाना समान्य व्यवहार मे नही आता है। इसलिए वह समय के साथ अपनो को ढ़ालने के लिए वक्त के आईना मे खुद को देखता है तथा जीने की कला विकसित करता है जिससे की वक्त के साथ सही तरीके से समायोजन हो सके। जिससे बाद वह खुद को आगे निकालने के लिए यथेष्ट बन जाता है।      यहां लेखिका खुद को…
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यादो का सफऱ

यादो का सफऱ

यादों का सफर योदों का सफर बड़ा लम्बा होता है। हमारे सफर की धुंधली तस्वीर हमारे मस्तिष्क मे लम्बे समय तक सुरक्षित रहता है। इस सफर का कुछ पहलु ऐसा होता है, जो हमारे अनुभव का भाग बन जाता है। जिवन यात्रा मे जहां हमें कठीनाई का सामना करना पड़ता है और हम कोई सहारा ढ़ुढ़ते लगते है, तो यही यादें हमारा मार्ग दर्शन करती है। जिवनदर्प उजियारा हो इसके लिए यादो के सफर का होना अच्छा माना जाता है। यह हमारी ओ सम्पत्ति है, जिससे हमारे जिवन को एक अर्थ मिलता है। बिध्न बिनाशक माने जाने वाले यह सफर…
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खुद की तलाश

खुद की तलाश

खुद की तलाश खुद की तलाश एक कठीन कार्य है, क्योकी लोग व्यवस्था की धारा मे जीये चले जाते है। उन्हें कभी खुद के लिए समय निकलता ही नहीं है, जिससे की वह देख सके की वाकई उसकी यात्रा का पड़ाव कहाँ होने वाला है। उसे लगता है, कि वक्त की इस अनमोल पल को रोककर व्यर्थ क्यो चिंतन करे। लेकिन व्यवस्था की अपनी सिमा होती है वह उसी के अनुरुप अपना कार्य करती है। य़दि आपके सामर्थ मे उसे समझने की क्षमता की विकाश है, तो आप वक्त की कठीनाईयो से आसानी से पार लग जायेंगे अन्यथा आपको बदले…
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