
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस ( National Broadcasting Day)
इंडियन ब्रोडकास्टिग कंपनी द्वारा बॉम्बें रेडियो स्टेशन से भारत देश का पहला प्रसारण शुरु किया। 08 जुन 1936 को इसका नाम बदलकर ऑल इडिया रेडियो किया गया। 1936 मे ही अधिकारीक तौर पर इसका नाम आकाशवाणी रखा गया। 1957 मे विविध भारती सेवा की शुरुआत हुई।
रेडियो के प्रसारण विकास के लिए अमुल्य योगदान दिया है। प्रसारण से जन-जन तक संदेश पहुँचाने से राष्ट्रीय चेतना को जागृति मिली है। दुर देश तक बैठे लोगो तक संदेश पहुँचाना आसान हुआ। राष्ट्र के अंदर चल रहे गतिविधि से सारे लोग अवगत हो रहे होते है। जिससे राष्ट्र के विकास की दिशा को समझने का अच्छा मौका मिल जाता है।
सुचना क्रांती से लोगो मे विश्वास बढ़ा है जिससे कार्य के प्रति सावधानी भी बढ़ी है। संदेश जब कोई मानव के लम्बे सुत्र से होकर आता है तो उसकी विश्वसनियता संदिग्ध हो जाती है। रेडियो के प्रसारण से ये संदेश मे पहले से ज्यादा पारदर्शीत मिलने लगी। किसी भी घटना क्रम की जानकारी सही समय पर लोगों तक पहुँचने से लोगों के मनोभाव मे बदलाव हुआ।
खेती बाड़ी, कानुनी बदलाव, देश विदेश के साथ मौसम संबंधि जानकारी से साथ लोगो का मनोरंजन भी होना शुरु हुआ। जिसके पास संसाधन नही है वो भी कुछ व्यवस्था से लाभ लेने लगे। राष्ट्र के विकास मे इस अभुतपुर्व योगदान से विकास की क्रांति हुई उसकी गुँज आज भी जारी है। अपने कार्य को करते हुए भी सामाचार सुना जा सकता है। तनाव मे, अकेले मे तथा विसात के समय लोगो के भावनात्मक सोच मे बदलाव हुआ है क्योकि उसके मन को स्थिर करने के लिए एक साधन मिल गया है।
आज भी लोग रेडियो को सुनते है। अपने पसंदिदा कार्यक्रम के प्रति लगाव रखते है। कार्य करते हुए उनका मनोरंजन के साथ जानकारी मिलती है। समय और कार्य दोनो का उचीत समानजस्य होता है जिससे लगो को जुराव है।
लगों मे इसके प्रति जागरुकता बढ़ाने और कार्य विकास की घारा से जुड़ने के लिए 23 जुलाई का प्रसारण दिवस प्रेरित करता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
संबंधित लेख को जरुर पढ़े।
- राष्ट्रीय ध्वज एकता के प्रतिक दर्शाता है।
- शतरंज एक बैधिक खेल है जिससे समझ की गहराई बढ़ती है।
- इमोजी भावना को प्रदर्शित करने मे सहायता करता है।
- दान समाजिक विश्वास को बढ़ाता है।