अंतर्राष्ट्रीय शतरंज दिवस

अंतर्राष्ट्रीय शतरंज दिवस

शतरंज बौद्धीक और मानसिक खेल के साथ मैत्रीपुर्ण संबंध को बनाना सिखाता है साथ ही रणनिती की जटीलता को समझना मे मदद करता है। इसकी उत्पत्ती छठी सताब्दी मे गुप्त सम्राज्य के दौराण चतुरंग के रुप मे हुई थी। 20 जुलाई 1924 को पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ की स्थापना हुई। इसी को जनजागरण करने के लिए इसे मनाया जा रहा है। खेल का अपना ही एक रोमांस होता है। लोग खेल की भवना से इसे खेलते है। लेकिन दिमागी कसरत का एक अनोखा उदाहरण भी है। इस तरह के खेल से कार्य को समझने तथा बिभिन्न पहलुओं को एक साथ नियंत्रित करने की कला को सिखने और अभ्यस्त होना सिखाता है।

घटना से सिखने के लिए एक लम्बा समय गुजरना परता है। लेकिन इसके लिए विकास की धारा को बनाये रखना चुनौति पुर्ण होता है। इसलिए मानसिक कसरत का अनोखा खेल हमें उत्साहित और कार्यशील बनाता है। एक साथ घटित हो रहे कई घटना को चिंतन के पटल पर लाकर एक युक्ति संगत हल निकालना होता है जो हमारे विकाश की धारा को बनाने मे मदद करता है। इसके लिए हमे सहज और सतर्क भी रहना होता है। खेल हमारी जहां बौधिक स्तर को बढ़ाता है वही पर हमारी समाज को एक नये आयाम से जोड़ता है।

विकस के बिभिन्न धाराओं के लिए लोग प्रेरित होते है और कार्य कुशलता के साथ आगे बढ़ते है इसमे शतरंज का खेल भी अनोखा है। हर कदम पर एक खतरा और हर खतरे का एक हल और हर हल के पिछे आपकी रणनिती कार्य को रोचक बना देती है। कुछ अभ्यस्त हो जाते है तो उसके लिए कोई भी नर्णय लेना आसान हो जाता है। जवकि कुछ के लिए सरदर्द का कारण बनता है। आज के भागमभाग भरी जिंदगी मे कार्य को करने की कौशल विकास के जरुरी प्रक्रिया को त्वरीत समाधान निकालना सिखाता है। इसके लिए शतरंज का खेल उपयोगी है।

20 जुलाई के दिन लोग इस खेल से जुड़े और स्वयं को उच्च स्तर पर आरोहन करने के लिए प्रयासरत रहे जिससे सफलता के नये – नये किर्तमान स्थापित होते रहे। मानव विकाश की एक लंबी प्रक्रिया को बनाये रखने के लिए बैधिक विकास जरुरी है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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