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राष्ट्रीय खेल दिवस
खेल हमारे। बचपन से शुरू होता है और जीवन पर्यंत चलता है। जिस खेल का हम मूल्यांकन करते है उसी खेल को जान पाते है बाकी सब अज्ञानता का हिस्सा है। यह खेल ही है जो बच्चों बच्चों के विकास में अहम भूमिका निभाता है। जैसे जैसे हम बड़े होते जाते है खेल व्यवसाय का जरिया बता जाता है और यही जरिया हमारे खुशी और नाखुशी का साधन बन जाता है।
आज का खेल जहां व्यवसाय है वहीं मनोरंजन का एक साधन भी और लोगों के आपसी जुड़ाव का जरिया भी। जो सामान्य सोच के व्यक्ति है वो स्वास्थ्य रहने के किए किसी न किसी रूप में क्रियाशील रहते है। उनकी यही क्रियाशीलता यदि एक व्यवस्था का भग वन जाती है तो उनका सर्वांगीण विकास होता है। अपने खेल के बारे में जाने और बयान को सुखी रखे। क्योंकि सुखी रखना भी आजकल बहुत बड़ा धन है।
खेल आजकल कई तरह से। खेल जाते है तो व्यवसायिक खिलाड़ी है ओ एक सीमित दायरे में अपना प्रदर्शन करते है। उसके एक प्रशिक्षक होता है जो उसके सफलता के लिए उसको नियमबद्ध करता है।
हॉकी का जादूगर ध्यानचंद को कहा जाता था। उनके जन्म दिन को खेल के लिए यादगार बनाने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए इसको मनाया जाता है। इसकी विधिवत शुरुआत 2012 से हुई। इस दिन खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, और ध्यानचन पुरस्कार दिए जाते है।
हमारे देश में प्रतिभा कि कमी नहीं है फिर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम पीछे है कारण जो भी हो एक जागृत की जरूरत है जो जागरूकता से ही आएगी।जय हिंद
लेखक एवं प्रेषक अमर नाथ साहू
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