
राष्ट्रीय अभिभावक दिवस (National Parents Day)
अभिभावक दिवस प्रत्येक वर्ष जुलाई के चौथे रविवार को मनाया जाता है। 2026 मे यह 26 जुलाई को मनाया जा रहा है। बच्चो के लानन-पालन करने से एक आंतरिक लगाव बन जाता है जिसको की प्रेम कहते है। जहां जैविक माता-पिता अभिवावक होते है वहां तो उनकी प्रवृति प्राकृतिक ही होती है। जिसके कारण उनका मनोभाव बना रहता है। पर अभिवावक बस्तुतः जैविक माता-पिता को नही कहा जाता है। वैसे लोग जो जैविक माता-पिता तो नही है लेकिन बच्चो का लानन-पालन अपने बच्चों का तरह ही करते है। जिससे उनके मनोभाव उच्च बना रहता है। जो बच्चे इस बात को जानते है या फिर जो बच्चे अनजान भी है तो भी अभिभावक सम्मान के पात्र है। उनके मनोबल को उच्च बनाये रखने के लिए समाजिक सम्मान भी जरुरी है जिससे की बच्चे परवरिश मे किसी भी तरह की किन्तु परंतु नही रहे।
माता यशोदा कृष्ण के प्रेम को कितनी बारीकी से समझती है। इस बात की यशोगान धार्मिक भाव मे भी झलकता है। प्रेम की उच्चता आपसी लगाव के साथ एक दिव्य मनोभाव के मिलन से भी बनाता है जो एक उच्च समाजिक ब्यवहार का हिस्सा है। कर्ण के लानन-पालन मे भी एक बहुत बड़ा संयोग है। कर्ण को सुतपुत्र कहा जाता रहा लेकिन उसके शौर्य को पुरा महाभारत सराहा। कर्ण का अपने अभिभावक के प्रति जो लगाव रहा वो अंत तक निभाया जो एक मिशाल बना। हलांकि वे अंत मे अपने जैविक माता पिता को सम्मान दिये लेकिन अभिभावक को उच्च सम्मान के साथ गरीमामयी साथ भी दिया।
समाज मे अभिभावके के सम्मान को उच्च बनाये रखने और जनजागरण से समाज के दवे कुचले को एक सहारा बनने वाले को प्रति सम्मान की भावना को जगाने का ये अनोखा दिन है। अभिवावक बनने की दृढ़ता बनती रहे और समाज के उच्च विकास होता रहे यह कामना हम करते है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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