राष्ट्रीय वन शहीद दिवस

वन संपदा की सुरक्षा काफी महत्वपुर्ण है। यह हमें कई तरह से लाभकारी है। वन संपदा मे छोट-बड़े पेड़ हरे पेड़ पौधो का विशाल भंडार होता है। यहां से जीवन के उपयोगी शुद्ध वायु प्राप्त होती है। जीव जंतु के द्वारा निकलने वाले हानीकारक कार्वऩडाईऑक्साइड को सोखकर जीवनोउपोगी लाभकारी ऑक्सीजन का उत्पादन करते है। पेड़ की हरीयाली जहां पशु पक्षी को चारा प्रदान करती है। वहीं पर इनके निचे ठहरने वाले को छाया भी प्रदान करती है।

पेड़ को सुखने पर इसका उपयोग जलावन के रुप मे किया जाता है। अच्छी लकड़ी का उपयोग घर, ऑफिस के लकड़ी के समान बनाने मे उपयोग होता है। पेड़ से बहुत सारे दवा का भी उत्पादन होता है जो मानव को सुखी बनाने के लिए महत्वपुर्ण है। वर्षा के चक्र को सक्रिय रखने मे भी पेड़ का बहुत बड़ा योगदान है। भोजन के लिए तो जीव जंतु पुरी तरह से पेड़ पैधे पर निर्भर है। इतने लाभाकारी पेड़ के होते हुए भी इसकी सुरक्षा का पुरा ख्याल नही रखा जाता है।

मानवी जरुरतो को ख्याल मे रखते हुए लगातार पेड़ काटे जा रहे है जिससे वन संपदा मे काफी कमी हो गई है। इसके तरफ लगातार सरकार का ध्यानकर्षण होता है। इसके लिए लगातार महिम चलाया जा रहा है। ऐसा ही एक यादगार मुहिम चलाया गया था जिसमे पेड़ को बचाने के लिए समाजिक पहल की गई थी। लेकिन इसकी भारी किमत चुकानी परी। खेजड़ली नरसंहार इसका जीता जगता उदाहरण है। 11 सितम्बर 1730 को राजस्थान के खोजड़ली के गांव मे लोगो ने वन की रक्षा के लिए जान दी। अमृता देवी के नेतृत्व मे खेजड़ी के पेड़ को बचाने के लिए 363 विश्नोई ग्रामीणों ने हरे-भरे पेड़ को बचाने के लिए अपने प्राणो का आहुती दे दी जिससे इस दिन को यादगार बना दिया।

11 सितम्बर के दिन को वन संपदा की सुरक्षा के लिए याद किया जाता है। जिससे की लोगो मे जागरुकता बढ़े और लोग वन के महत्व को समझे जिससे समाजिक क्रांती की शुरुआत हो और एक बेहतर मानव जीवन की उतकंण्ठा पुरी हो। मानव अपने जरुरतो को दुसरे विकल्प से दुर करे और पेड़ को सुरक्षा मिले इसकी जानकारी सबको हो इसके लिए इस मुहिम को चलाना जरुरी है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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