अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

मानव जाति के विकास के साथ ही समुह मे जीने के विधा का विकास हुआ जिससे समस्या से लड़ने मे जहां आसाना हुई वहीं पर भौतिक जीवन को समझने मे काफी सहयोग हुआ। उस समय से ही मानव समुह मे रहना शुरु किया। तब से आज तक का लम्बा सफर तय हुआ। इस समय मे कई मानव संभ्यता विकसित हुई और समाप्त हो गई। सभी के अपने कुछ कारण थे और कुछ विशेषतायें थी। राजतंत्र व्यवस्था का इसके बड़ा महत्व रहा है। जहां पर राज को राज का सर्वेसर्वा माना जाता था। राजा को भगवान का दर्जा प्राप्त था। पहले के समय मे कोई लिखित संविधान नही होता था। राजा को अपने सहयोगी के सहयोग तथा अपने विवेक से निर्णय लेने होते थे। इसमे कई तरह की वंसिगतियां देखने को मिली। बितते समय के साथ जनता मे असंतोष की भावना का विकास हुआ और नये विचार को जन्म दिया उसका नाम था लोकतंत्र।

लेकतंत्र की खासियत है कि यहां जनता के द्वारा जनता पर और जनता के लिए किया गया शासन माना जाता है। इसमे चुनाव की एक प्रक्रिया होती है जिसमे कोई भी सक्षम व्यक्ति राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर सकता है। राष्ट्र के विकास मे अपना योगदान दे सकता है। इसमे लिखित संविधान की व्यवस्था होती है। एक न्यायलय होता है जिसको संविधान के अनुसरा निर्णय लेने की अधिकार प्राप्त होता है। एक ढ़ाचागत व्यवस्था का निर्माण होता है जिसमे लोग विकास की दिशा मे आगे बढ़ते है। समाज के अंदर की हर छोटी बड़ी बातो को समाज के स्तर से उपर तक लेजाकर उसके समाधाने करते हुए उच्च स्तर के समाजिक विकास की अवधाना को किया जाता है।

आज के समय मे लोगतंत्र के समाजिक विकास की सबसे जरुरी प्रक्रीया माना जाता है। ऐसा समझा जाता है कि इसमे समाज के हर तरह के लोगों का प्रतिनिधित्व मिलता है जिससे समाज का सर्वाणगिन विकास संभव हो पाता है। किसी भी राष्ट्र के लिए राष्ट्र का चहुमूखी विकास जरुरी है जिससे की राष्ट्र की समृद्धी के साथ समाज का कल्याण हो सके। जिवन के मुलभूल अवश्यता के साथ उसके मान सम्मान की रक्षा तथा धार्मिक स्वतंत्रता भी मायने रखता है। लोकतंत्र मे इस तरह के विचार तेजी से चलते है और समाज के हमेशा एक उन्नत विचार के लोगो का प्रतिनिधित्व मिलता है।

मानवाधिकारो की रक्षा की बात समय- समय पर  होती है जब कोई तानाशाह व्यक्ति समाजिक ढ़ाचा को विगारने की बात करता है या ऐसा जान परता है तो लोकतंत्र मे मानवाधिकारों की रक्षा की बात होती है। मानव के अधिकार मे बोलने का स्वतंत्रता, अपने विचार को रखने की स्वतंत्रा तथा अपने जीवन को अपने हिसाव से जीने की तरीके के लिए स्वतंत्रता की बात होती है। इस प्रकार से एक देश दुसरे देश के साथ जुड़कर विकास की एक प्रक्रिया को सुनिश्चित करते है। लोकतंत्र मे सभी की भागीदारी बढ़े और सबका प्रतिनिधित्व हो इसके लिए लोगो मे जागरुकता जरुरी है।  15 संतम्बर के खास दिन को लोकतंत्र की सुदृढ़िकरण के लिए लोगो को प्रोतसाहित करने के उदेश्य से बनाया गया है। लोगो मे जागरुकता उसको उसके अधिकार के प्रति सावधान करेगा और एक उन्नत समाज का निर्माण होगा।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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