विश्व सफाई दिवस (World Cleanup Day)
साफ – सफाई का अपना ही महत्व है। साफ सफाई सभी को अच्छा लगता है। इसके लिए कोई खास नियम नही होता है। अपने को खुद मे एक विश्वास पैदा करना होता है और मन की बृति इसको साध लेती है जिसके बाद सारा काम खुद अपने गति से संचालित होने लगता है। मन मे यदि विचार सिर्फ कार्य करने और अधुरा छोड़कर चले जाने के विचार तक सिमित हो तो यह आदत कार्य के बाधा लाती है और गंदगी मे रहने या गंदगी फैलाकर नई जगह चले जाने या किसी की सहारा लेकर कार्य करने के लिए सतत मन प्रयत्नशिल रहता है।
इस तरह के विचार को दुर करते हुए स्वयं के लिए एक अच्छा मनोभाव बनाने के लिए अभ्यस्त होना होता है। एक बार जब स्वयं को सचेत कर लिया तो जीवन के अच्छे दिन शुरु हो जाते है। हमारे कार्य को करने के लिए पुर्व से सारी व्यवस्था को करते हुए अंत तक की सारी व्यवस्था तक से सभी काम सही समय पर पुरे होते है। हमारा दिमाग खुद हमे कार्य के लिए तत्पर कर देता है और हमारी एक अलग पहचान बन जाती है जिसमे हम कार्य को सही तरीके से करते हुए खुद के लिए एक अच्छी परिस्थिती की चुनाव करते है।
साफ सफाई रहने से जहां बीमारी नही होती है। वहीं पर मन भी प्रफुल्लीत रहता है। टामटोल की स्थिती हमे हमारे स्वभाव से गिरा देती है। जीवन के मुल्यो के बारे मे विचार को भी भ्रमित कर देती है। हमेशा हमे अच्छे के लिए किसी की सहयोग की आवश्वकता पर निर्भर रहना परता है। पार्यावरण हो या हमारी घर या फिर हमारे आसपरोस एक बार जब अच्छी करने की आदत पर गई तो हमे दुसरो को भी सिखाते है तथा खुद के लिए भी एक बेहतर विकल्प के साथ आगे बढ़ते रहते है।
जीवन जीने के लिए हम जिस तरह के विचार का समावेश अपने जीवन मे करते है उसी तरह के हमारे व्यवहार बनते है और हमारी जीवन के साथ होने वाले हमारे लोग भी उसी विचार के मिलते है जिससे हमारे सारे कार्य भी उसी के अनुसार हल होते है। हमारी यही भावना हमे सबलता प्रदान करती है। सुखी जीवन के सच्चे गुण को हमेशा आत्मसात करने की जरुरत होती है। इसके लिए हमे सतत सतर्क रहने की जरुरत होती है। हम भी सही रहे और दुसरे को भी सही रहने की प्रेरणा दे यही हमारा जीवन उदेश्य होना चाहिए।
20 सितम्बर का खास दिन इसी भावना को जागृत करता है। सुस्त मन, आलसी मन हमे हमारे व्यवहार से गिरा देती है और हमारा नुकसान कर देती है। इसके लिए हमे तैयार रहना होगा और लोगो को साफ सफाई रहने के लिए भी प्रेरित करना होगा जिससे की एक सजगता का संचार हो और एक स्वस्थ्य समाज का निर्माण हो जिससे जीवन सुंदर और योगपुर्ण बन जाये।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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