बाबा साहेव भीमराव अम्बेदकर

बाबा साहेव भीम राव अम्वेदकर

  बाबा साहेव भीव राव अम्बेदकर जी का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के महु मे हुआ था। वे अपने माता पिता के 14 वें संतान थे। बचपन से ही उन्होने सामाजिक तान-वाना को करीव से देखा। समाज मे छुआछुत की व्यवस्था उस समय चरम पर थी। उन्होने अपने कार्य क्षमता को बढ़ाया और उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होने कोलंबिया और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स दोनो ही विश्वविध्यालय से इकोनॉमिक्स मे डॉक्ट्रीयट की उपाधी प्राप्त की। उन्होने विधी शास्त्र पर शोध भी किया।

   भारत के संविधान के प्रारुप समिति के अध्यक्ष बने। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि और न्याय मंत्री बने। उन्हे भारतिये संविधान का जनक भी कहा जाता है। उन्होने साविधान को लेकरके कई तरह की भविश्वानीयां की जो आज महसुस किया जा रहा है। समय के साथ संविधान मे बदलाव और सुधार तो होते रहते है लेकिन भारत जैसे विशाल देश के लिए संविधान की मुल भावना को यथावत बनये रखना आज चुनौती बनता जा रहा है।

   राजनिति के माया जाल को राष्टीये चेतना ही काट सकती है इसकी कमी भारत मे देखी जा रही है। लोग व्यक्तिगत स्वार्थ मे संविधान को तोड़ने मोड़ने पर आमदा है जिससे भारत की व्यवस्था को ठेस पहंच सकती है। इसको लेकरके संविधान निर्माता के भाव को समझना होगा।

   बाबा साहेव ने समाज की जिस कुरुरतीयो को वे तोड़ना चाहते थे उसमे सफल नही हुए क्योकि समाज ने जिस कुव्यवस्था को सहा है उससे जो उसमे बदलाव हुआ वो उसको ही अपनी जिवनशैली बना लिया है। अब उससे बाहर आने के लिए एक संयुक्त और साहसिक प्रयास की जरुरत है जिसमे समय लग सकता है। बाबा साहेव ने खुद के लिए बौध धर्म को 1956 मे अपना लिया। उन्होने अपने विचार को बौध धर्म मे एक किताब लिखकर व्यक्त किया और नवाचार बौध धर्म की शुरुआत की।

  उनकी प्रायास कहां तक सार्थक रही इसकी विवेचना तो समय करता रहेगा। पर संविधान मे भारत के विकाश के लिए जो उन्होने काम किया और सभी वर्गो के लोगो की भागीदारी सुनिस्चित की इसके लिए उन्हे याद किया जा रहा है। आज उनके जन्म दिन पर उनको नमन।

लेखक एवं प्रेषकः- अमर नाथ साहु

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By sneha

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