
नेशनल रॉक डे (National Rock Day)
मानव के विकाश के शुरुआती दिन चट्टानों पत्थरों और कंदराओं मे बीता। समय के साथ उनकी बढ़ती जिज्ञासा और साहस के साथ कार्य ने उनके विकाश की अनोखी गाथा लिखी जो आज के विकसित मानव समाज के रुप मे दिख रहा है। आज की जीवन मे भी चट्टानों और भूविज्ञान की अहमिता कम नही हुई है वल्कि और बढ़ गई है। प्राकृति के गर्भ में बहुत सारे रत्न छिपे हुए है। उसको जानने समझने तथा समय के साथ अपने उपयोग के रुप मे विकसीत करने के लिए सतत प्रयास जारी है।
मानव के उतरोत्तर विकाश मे भूविज्ञान और चट्टान का बड़ा योगदान रहा है। मनाव विकाश की गाथा आज भी चट्टानो पर खुदी हुई मिलती है। मानव विकाश के साथ तो सब कुछ समय के साथ मिट गया लेकिन उनके बनाये और लिखे शिलालेख आज भी हमे उत्साहित करते है। इसको समझने की हमारी कोशीश आज भी चल रही है। भूविज्ञान को आज भी समझने के लिए प्रयास किये जा रहे है। मानव विकाश के लिए बहुत सारे खनीज धरती के अंदर से ही निकाले जाते है।
विकाश की अनवरत घारा बहती रहे इसके लिए मानव मन को अपनी खोज की पाकृति को बनाये रखना होता है। इसके लिए हमे बहुआयामी सोच को रखना होता है। इसी सोच से हमारे विकाश की उच्च मानडंड को पुरा करना संभव हो सका है। आज के दिन को भूविज्ञान, चट्टानों की हमारी प्रकृति में भूमिका और मानव इतिहास के निर्माण मे उनके महत्व के विषय मे जानकारी के लिए विशेष रुप मे चिहित किया गया है। इसके लिए जागरुकता बनाने की जरुरत है जिससे की हमारी समझ का दायरा बढ़े और विकाश की घारा को बनाने रखने हमे मदद मिले।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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