
अंतर्राष्ट्रीय शार्क जागरुकता दिवस (International Shark Awareness Day)
शार्क एक मांसाहारी जीव है। इसको मछली की श्रेणी में रखा गया है। ये छोटी-छोटी मछलियां, सील (Seal), अन्य समुद्री और स्तनधारी जीव को अपना शिकार बनाती है। इसके मुंह में तेज दांत होते है। शार्क अमतौर पर मीठे पानी में नही रहती है, लेकिन गंगा शार्क सिर्फ मिठे पानी मे ही रहती है।
मनुष्य शार्क के मांस या पंखों के लिए इसका शिकार करते है। 1970 से शार्क की आबादी में 71% की कमी आई है, जिसका मुख्य कारण अत्य़धिक मछली पकड़ना है। शार्क के पंख मे बीएमएए उच्च सांद्रता के साथ पाई जाती है। जिसका उपयोग एल्जाईमर रोग और पार्किसंस रोग जैसी तंत्रिका अपक्षयी बीमारीयों मे इसकी रोग संबंधी भूमिका के लिए किया जाता है।
लगातार घटती शार्क मछली की संख्या के कारण इसको प्रतिवंधित किया गया है। इसको महासागरीय परिस्थितिकी तंत्र का महत्वपुर्ण हिस्सा माना जाता है। शार्क की लम्बाई 17 सेमी से लेकरके 12 मीटर तक होती है। यह 2000 मीटर तक की गहराई तक पाया जाता है। परिस्थतिकी में एक दुसरे को बनाये रखने के लिए प्रकृति का उत्तम व्यवस्था होता है। वही मानव के बढ़ते प्रभाव के कारण इसके तंत्र को बिगरने से समस्या उत्तपन्न हो रही है।
इसको संरक्षण के लिए लगातार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किये जा रहे है। 14 जुलाई को विषेश रुप मे शार्क जागरुकता के रुप मे मनाया जा रहा है। इसको जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर से कार्य करने की जरुरत है जिससे की परिस्थितिकी अपने हिसाव से नियंत्रित हो सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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