अंतर्राष्ट्रीय चन्द्रमा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय चन्द्रमा दिवस

1969 में 20 जुलाई को नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन अपोलो 11 के इगल लूनर मॉड्यूल जरिए चन्द्रमा पर कदम रखा। मानव की इस एतिहासिक दिन को याद करने के लिए आज के दिन को चन्द्रमा दिवस के रुप मे संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2022 मे मनाने की धोषणा की।

चन्द्रमा पर मानव के जाने के बाद एक लम्बे समय के लिए इस अभियान को बंद कर दिया गया। कहा गया की वहां पर गुरुत्वाकर्षण कम है और पानी नही है। इसके लिए व्यपारिक नजरीये से उपयुक्त नही नही है। लेकिन बढ़ते विज्ञान की जानकारी ने भाव को गहरा किया और ये समझा गया कि चन्द्रमा के दुसरे भाग जो की धरती के तरफ नही रहता है और सुर्य की किरन भी बहुत कम परती है। वहां पर पानी हो सकता है। इस प्रकार के जानकारी के बाद भारत ने अपना चन्द्रयान 1 उतारा जो की सफल नही रहा। उसके बाद चन्द्रयान 2 उतारा जो सही रहा और वहां के बारे मे जानकारी हुई।

लगातार हो रहे जानकारी के बाद लोगो को इसके तरफ ध्यान गया है चीन सहीत कई देश पर इस काम कर रहे है। अमेरिका भी चन्द्रमा पर फिर से जाने और व्यपारिक अभियान शुरु करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए लगातार अभियान चला रहा है। आने वाला वो दिन दुर नही जब मानव का व्यवसायिक आवास वहां पर बनेगा। आजकल बैश्विक युद्ध के चलते बहुत बड़ी आशंका बनने लगी है जो अंतरिक्ष की ओर लोगो का ध्यान खिचा है। कहा जा रहा है कि दुसरे ग्रह पर खतरनाक हथियार रखने के लिए गुप्त मिशन चालाया जा रहा है। यही उत्सुकता ने सबकी ध्यान खिचा है।

मानव का मन चन्द्रमा के लिए शुरुआती समय से ही उत्सुकता का विषय रहा है। आज हमारी जानकारी अधिक है लेकिन उसके उपयोग के बारे मे जितनी जरुरी है उसके लिए प्रयास चल रहे है। लागत कम हो और बराबर उपयोग किये जा सकने वाले यान विकसित हो इसके प्रयास चल रहे है जिससे आने वाले समय मे सफलता जरुर मिलेगी।

लोगो की उत्सुकता को गहराई देने और चन्द्र अभियान को गति देन के लिए चन्द्रमा दिवस को मनाया जा रहा है। जिससे की लोगो का ध्यान बढ़े और मानव विकास की कड़ी को और आगे बढ़ाया जाय।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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