
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस
बाघ हिंसक, मांसाहारी जानवर है जो अपने प्राकृतिक आवास में रहते हुए स्वतंत्र विचरण करते है। जंगल की कटाई और व्यवसायीकरण से उसके आवास की जहां हानि पहुंची है। वही शिकार की उपलब्धता भी कम हुई है। जिसके कारण ये शिकार की खोज में जंगल के बाहर आने लगे है। जिसके कारण आए दिन दुर्घटना होती रहती है।
बाघ कुल अंतर्राष्ट्रीय आबादी का 70% भारत में है। फिर भी इसकी संख्या घट रही है। कारण इसके व्यावसायिक जरूरत के लिए के लिए की जा रही हत्या है। इसके नियंत्रण के लिए 1973 में टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाए गया। जिसके बाद इसकी अवधि में वृद्धि देखी गई है।
29 जुलाई का खास दिन जन जागरूकता के लिए विशेष है। जिससे कि इस प्रकृति जीव के बारे में व्यापक चर्चा हो सके। जय हिंद
लेखक एवं प्रेषक अमर नाथ साहू
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