विश्व अनुवाद दिवस

विश्व अनुवाद दिवस
विश्व अनुवाद दिवस
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विश्व मे अनेक तरह की भाषा बोली जाती है। सिर्फ भारत मे ही बहुत सारी भाषा बोली जाती है। विश्व स्तर पर कुछ प्रमुख भाषा है जो की अंतर्राष्ट्रीय ख्याती पा चुकी है जबकि कुछ भाषा है जो ऱाष्ट्र भाषा के रुप मे हर देश को परिभाषित करती है। भाषा एक ऐसा माध्यम है जिससे एक दुसरे के मनोभाव को जाना जा सकता है। बिना भाषा के विचार का आदान प्रदान करना मुश्किल होता है।

अनुवादक के रुप मे एक भाषा के जानकार दुसरे भाषा के बारे मे समझ सकते है। भारत मे बहुत सारे पैराणिक ग्रंथ है जिसका अनुवाद बिभिन्न भाषाओं मे हुआ है जिससे लोग भारत के संस्कृतिक विकास के बारे मे गहराई से जान सकते है। हमे भी दुसरे देश के बारे मे जानने के लिए अनुवादक की जरुरत होती है जिससे की वहां के बारे मे पुरी जानकारी पा सके।

समय के साथ लोग अपने सहुलियत से भाषा को तोड़ मड़ोर देते है जो अभ्यास का हिस्सा बन जाती है और वह इतनी प्रचलीत हो जाती है की वह भाषा का हिस्सा बन जाती है। धिरे-धिरे भाषा परिवर्तित होती जाती है। एक भाषा के जानकार दुसरे भाषा की जानकारी प्राप्त करते है और फिर दोनो तरफ की भाषा को एक दुसरे के साथ अनुवाद करते है। इस तरह से विचार का आदान-प्रदान आसान हो जाता है। जिससे की एक दुसरे के बारे मे जानने मे आसानी होती है।

आज का समय वैश्विक बाजार का है जिसमे एक देश के लोग दुसरे देश मे व्यपार के लिए जाते है। कुछ लोग पर्यटक बनकर धुमने जाते है जिससे की वहां की संस्कृति के बारे मे जान समझ सके। भाषा अलग होने से अनुवादक की जरुरत होती है  जिससे की वहां के बारे मे जानकारी प्राप्त कर सके। विज्ञान की समझ एक जैसी है पर भाषायी अंतर के कारण लोगो का पठन-पाठन उसकी अपनी भाषा मे होता है।

कई लोग कई भाषा के जानकार होते है जिससे की उनके समझने का दायरा बड़ा हो जाता है। वो एक स्थान से दुसरे स्थान तक आसानी से जाकर धुलमिल सकते है। भाषा एक दुसरे को समझने का अच्छा माध्यम है। आजकल फिल्म भी अनुवाद करके एक देश से दुसरे देश मे चलती है।

30 सितम्बर का खास दिन अनुवाद के रुप मे समझा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के द्वारा इस विशेष  समय का मतलब एक दुसरे को समझने को आसान बनाने के लिए है। लोगो को चाहिए की ओ दुसरे के भाषा को समझने के लिए आगे आये जिससे की भाषाई बिभिन्नता के कारण विकास की गति धीमी ना हो। क्षेत्रिय स्तर पर भी भाषाई कठीनाईयां होती है इसको भी दुर करने की जरुरत है। इसके लिए लोगो को अपने स्तर से प्रयास करने की जरुरत है जिससे की आपसी विश्वास को बढावा मिले।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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