विश्व नदी दिवस

विश्व नदी दिवस
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नदी को किसान की जीवन रेखा कहा जाता है। किसान को अपने भूमी को पटवन करने के लिए पानी की जरुरत होती है और ये पानी सहजता के साथ नदी होकर किसान तक पहुँच जाता है। इस पानी के अनेक फायदे है। पानी जिस भी रास्ते से आता है वहां की भूमि को नमी से भर देता है जिससे की पानी सहजता के साथ खेत तक पहुँच जाती है। इसके साथ इसपर लागत राशी भी बहुत कम खर्च करनी परती है। दुसरे किसी भी माध्यम से पानी के पहुँच को बनाने के लिए लागत अधिक आती है और पानी ज्यादा देर टिकता भी नही है। बार-बार पानी देने की समस्या बनी रहती है।

नदी मे बरसात मे जमा किये हुए पानी भी वहां पहुंच जाती है जहां वारिस कम होती है। किसान के लिए नदी नाला उसके भूमी को उपजाव बनाते है। पानी के साथ आने वाला बहता हुआ मिट्टी भी उपजाव का कारण बनता है। दुसरे माध्यम से पानी पटाने के बाद तेज गर्मी से पानी सोख लेती है और खेत सुखा रह जाता है। इससे किसान को काफी हानी उठाना परता है। आजकल नदी को सही करने की अभियान को चलाया तो जा रहा है लेकिन इसे आपसी जोड़ को ठीक नही किया जा रहा है जिससे समय पर पानी पहुँचना मुश्किल हो गया है।

नदी को एक दुसरे से जोड़ने की जरुरत है जिससे की पानी के बहाव को सुनिश्चित किया जा सके। समय के साथ नदी मे जमा होने वाले गाद को भी हटाया जाना जरुरी है जिससे की नदी की गहराई सही से बनी रहे। यदी नदी के मेड़ को कोई हानी पहुँचती है तो उसको समय से मरम्मत कराने की जरुरत है। यदि ऐसा होता है तो किसान के लिए ये किसी बरदान से कम नही है। किसान को पानी समय पर मिलने से उसकी आधी समस्या का समाधान मिल जाता है।

भूमी की नमी को बनाये रखना एक चुनौति पुर्ण कार्य है। वर्षा का जल को संरक्षित करने के लिए तालाब की हालात भी दैनिय हो गयी है जिससे की किसान को समस्या का सामना करना परता है। अब तालाब मे भी मछली पालन होने से वहां की पानी की उपलब्धता भी कम कर दी गयी है। जिसके कारण पानी की समस्या बनी रहती है। मौसम मे परिवर्तन के कारण बर्षा कम होने से भूमिगत जल भी प्रभावित हो रहा है। इसके बाद जमीन की सुखी भूमी पानी ज्याद सोखती है।

नदी को फिर से जीवंत करने की जरुरत है जिससे की किसान को सही समय पर जल मिले। इसके लिए सरकार को ध्यान देने की जरुरत है। भारत एक कृषि प्रधान देश है यहां की 80% जनता कृषि पर आधारित है फिर भी यहां की नदी के हालात अनुकूल नही है। इसको सही करने की जरुरत है जिससे की किसान को सही समय पर जल का प्रवंधन हो सके।

27 सितम्बर का दिन खास तौर पर किसान और सरकार का ध्यान नदी की ओर खिंचने और इसपर गहराई से विचार विमर्श करने की जुरुरत है जिससे की समस्या का समय रहते हल निकल आये और कार्य आसानी के साथ हो सके। इसको जनजागरण का अभियान बनाकर कार्य को आसान बनाना है और किसान को खुशहाल करना है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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