
अपने जीवन का मूल्यांकन दिवस ( Evaluate Your Life Day)
अपने जीवन का मुल्यांकन करना सफल लोगो के लिए बहुत बड़ी कुंजी है। इसके द्वारा व्यक्ति स्वयं की आंकलन करता है और आगे बढ़ता जाता है। व्यक्ति को कहां कैसे और कब किस तरह से पेश आना है ये सब वह स्वयं अपने सामर्थ से तय करता है और जीत का शिखर हमेशा उंचा रखता है। जीत के लिए पहले तैयारी करनी होती है अपने कमजोर पहलू को ठीक करना होता है। अपने मे सिमट कर जीना होता है जिससे की उसका कार्यवल उच्च हो सके।
अनावश्यक किसी से टकराना और उलझकर परेशानी मोल लेना काबलियत की निशानी नही होती है। वल्कि स्वयं के लिए एक बेहतर जगह तलाशना एक अच्छी पहल होती है। कार्य का चुनाव और कार्य के साथ आगे बढ़ने का उत्साह व्यक्ति के क्रियावल को जागृत करता है। कार्य को करने से जो सीख मिलती है वह उसका वास्तविक दौलत होता है। समय और परिस्थिती स्थाई नही होती है। इसके लिए तैयारी हमेशा करनी परती है।
मुल्यांकन का मतलब होता ही है स्वयं का आंकलन करना और तैयारी करना। समाज कल्याण की भावना रखने वालो के लिए सबका साथ होता है जिससे उसका क्रियाबल गुणित होते रहता है। वह अपने लिए एक बेहतर माहौल को बनाता है और सतत उर्जावान रहने के लिए प्रेरित रहता है। हर स्तर पर स्वयं का मुल्यांकन करना चाहिए।
लेखक एवं प्रेषक- अमर नाथ साहु
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