
राष्ट्रीय सक्सस्केल दिवस ( National Exascale Day )
विज्ञान के विकास ने रोज नये-नये दरवाजे खोल रहा है। जहां से विकास की रोज नई दिशा खुल रही है। विकास की जितनी दिशा खुलती है चुनौतियां भी उतनी ही बढ़ती जाती है। बढती चुनौतियों के बीच लगातार खोज चलता रहता है। विकास की इसी क्रम मे सुपरकम्प्यूटर की आवश्याकता ने मानव को झकझोर दिया। सुपरकम्प्यूटर ने गणना के आंकड़े और उसकी सटीकता को इतना बढ़ा दिया की इस तरह की गणना समान्य मानव के वस मे नही है लेकिन मानवी अवलोकन के सामने ये अभी भी कम है। इतना तो है कि हमारे पास आनेवाली चुनौति का सामना करना अब आसान हो गया है।
सुपरकम्प्यूटर की गणना एक क्यूटीलियन यानी 1018 गणना प्रति सेकेन्ड होता है। यह समान्य कम्प्यूटर से लाखों गुणा ज्यादा गणना कर सकता है। इस तरह के मशीन से प्राकृति मे घटने वाली घटना का सही से मुल्यांकन करने मे आसानी होगी। प्राकृति मे कुछ ही पल मे बहुत सारी घटना घटीत हो जाती है। इस घटना से प्राप्त आंकड़ा को समझना तो मुश्किल नही होता है पर इसके आंकड़े को मिलाकर कुछ नया करने के लिए व्यवस्था छोटी पर जाती है। इस तरह के गणना से ही बर्तमान समय मे बहुत सारी जानकारी मिलने लगी है।
मानव आज विनाश के कगार पर है इसका कारण उसके द्वारा विकसित किये गये अधुनिक मशीन ही है जो बहुत ही विनाशकारी है। इस बिनाश की रचना करने वाले भी नही रहेंगे और इसके शिकार लोग भी नही रहेंगे लेकिन फिर भी तकरार जारी है। इस मिथ्या भरी जिन्दगी मे लोग सत्य की खोज मे लगे हुए है पर जीवन तो सत्य से परे है। हमारी बढ़ती उत्सकता का पराव क्या होगा यो तो आने वाला समय ही बतायेगा पर विकास की ये यात्रा जारी रहेगी। आनेवाले समय मे इससे भी शक्तिशाली गणक बनने की संभावना अभी खत्म नही हुई है।
मनवी सोच की बहुआयामी व्यवस्था मानव को लगातार उच्च बनाती जा रही है। नये-नये आयाम जोड़े जा रहे है। जैसे-जैसे शोध बढ़ती जाती है हमारी उत्सुकता भी बढ़ती जाती है। विश्वास की इस डोर को आगे ले जाता आज का विकास इस तरह के विचार को और आगे बढाने को प्रेरित करता है। इसके लिए 18 अक्टूबर का दिन खास है जो आगे बढ़ने के लिए आशी भरी उम्मीद देता है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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