विश्व सुनामी जागरुकता दिवस

विश्व सुनामी जागरुकता दिवस
विश्व सुनामी जागरुकता दिवस
सुनामी की तेतावनी को नजर अंदाज ना करे।

समुद्र विशाल जलराशि से भरा हुआ है। इसकी विशालता को एक सीमा मे बांधना सही नही है। इसमे लगातार ज्वार भाटा उठता रहता है। ठंढ़ी हवाये चलती रहती है। समय-समय पर छोटे बड़े परिवर्तन देखने को मिलते रहते है। समुद्र के आंतरिक हलचल से कई तरह की विषमता से इंकार नही किया जा सकता है। समुद्र के अंदर आने वाले ज्वालामुखी के कारण समुद्र मे भीषण उछाल आता है। इस उछाल के कारण समुद्र का पानी काफी ऊपर उठ जाता है जिसके कारण पानी का एक सैलाव उमड़ परता है। पानी के इस सैलाव को समान्य व्यवस्था से रोक पाना संभव नही होता है।

पानी की ऊपर उठने से आने वाली ज्वार एक भीषण लहर का रुप ले लेती है। यह लहर काफी ऊंचा होता है और तेजी के साथ समुद्र के तट के तरफ बढ़ने लगता है। इस लहर की प्रचंढ़ता को देखते हुए समुद्र के आसपास के इलाके को पुर्वानुमान के हिसाव से खाली करा लिया जाता है। नाविको को समुद्र मे नही जाने की सलाह दी जाती है। जो नाविक समुद्र मे है उसको वापस आने को कहा जाता है। पानी के इस आक्रमकता के कारण इसको सुनामा कहा जाता है। इसमे जानमाल की भारी क्षती होती है। पानी का ये सैलाव जब समुद्र के तट से टकराता है तो समुद्र के किनारे पर अवस्थित सारा अवरोध को तोड़ते हुए उसको अपने साथ बहा ले जाता है।

सुनामी से होने वाली क्षती को कम करने के उदेश्य से ही जन जागरुकता के लिए 05 नवम्बर के दिन को खास बनाया गया है। चेतावनी को जारी होते ही लोगो को समुद्र मे नही जाना चाहिए। समय के साथ सुरक्षित जगह पर चला जाना चाहिए जिससे की नुकसान कम उठाना परे। इसके साथ आने वाली हवा भी काफी तेज होती है जो अपने से बड़े से पेड़ा को भी ऊखाड़ ले जाती है। इसलिए पेड़ के पास छुपना नही चाहिए। मजबुत आधार और छत बाले घर मे ही व्यक्ति को सरन लेनी चाहिए जिससे की सुरक्षा की कड़ी को मजबुत बनाया जा सके।

वैश्विक जानकारी के हिसाव से समुद्र के अंदर होने वाली हलचल को जनावर पहले ही भाफ लेते है जिससे की उसके क्रियाकलाप मे परिवर्तन आने लगता है। उसके अपने सुरक्षित स्थान पर जाने की प्रक्रिया देखी गई है। इस तरह की प्रतिक्रियात्मक विचार को भी सावधानी के रुप मे लिया जा सकता है। समुद्र के काफी किनारे अपने वास स्थान को नही रखना चाहिए जिससे की नुकसान कम होगा। जन जागरुकता का ये अभियान सबको होना चाहिए जिससे की जानमान की कम क्षती हो।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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