जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा

 रथ यात्रा हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाये जाने वाला प्रमुख उत्सव है। इस रथ पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए अपने मैसी के घर जाते है यानी गुडिचा मंदिर। श्रधालुओं की भीड़ रथ को खिचकर ले जाता है। आस्था और विश्वास के संगम का ये अदभुत प्रकटिकरण है। बर्षो से चली आ रही ये परंपरा लोगो मे रच बस गयी है। लोगो के इसके प्रेरणा से होने वाले लाभ भी दिखने लगे है। जिससे इसके प्रती लोगो का जन सैलाब उमर परता है।

  व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यो ना हो नगर भ्रमण के लिए निकलने से समाज के प्रति उनका नजरीया और समाज के रहन-सहन का अवलोकन होता है जिससे एक स्वस्थ्य विचार का आगमन होता है। इसके साथ ही अपनो से मिलने जुलने से नयी संभावनाओं का माहौल बनता है। समाज को दिया जाने वाला ये अनोखा संदेश समाज की सुदृढ़िकरण का अदभुत नमुना है। भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर मे समाज के निर्माण और उसके संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का इससे सहज और आसान साधन कुछ हो भी नहीं सकता था। समाज के आस्था और विश्वास मे समाज की एकता और अखण्डता का बीज छुपा हुआ है।

 जीवन के हर मोड़ पर हमें अपने विचार को परिशुद्ध करना परता है जो समय और परिस्थिती के हिसाब से व्यवस्थित होता है। इसके लिए लगातार एक दुसरे के संपर्क मे रहने की जरुरत होती है। हमारा समाज स्वार्थ की जिस कड़ी में जुड़ा हुआ है उससे उसके एकता की कड़ी टुटने लगती है। इस टुटती कड़ी को जोड़ने और शक्तिशाली बनाने के लिए किसी लिखी किताब की नही बल्की एक समाजिक अवधारना के साथ खुद के बदलाव की है। विकाश की प्रक्रिया के दौराण बहुत कुछ बदलता है पर मूल सिधांत वही रहता है उसकी प्रसंगिकता हमेशा बनी रहती है। जीवन को जोड़ने वाली विचार धारा को माला मे पिरोना परता है जिससे कि एक स्वस्थ्य विचार के साथ समाज का भी निर्माण हो सके।

 मनव मन सतत ही चिंतनशील रहता है लेकिन चिंतन की एक दिशा मे हो जरुरी नही है। इसी को नियोजित करने के लिए इस तरह के आयोजन की जरुरत है। कार्य के साथ कार्य का वारीकी अवलोकन ही हमे तकतबर बनाता है। हमारा उत्साहवर्धन भी होता है और ज्ञान की सरिता भी बहती है इसी भावो के बीच हमारा समाज की आंतरिक शक्ति मजबुत होती है।

आज का खास दिन भगवान को प्रमाण करने तथा उनके संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का दिन है जिससे की समाज को एक मुजबूत आधार मिल सके। जिससे विकाश की सतत धारा बहती रहे। हमारे गुणकारी पुर्वज ने हमारे लिए विचार के जो अनमोल मोती हमारे आस्था के जरीये हममे पिरयें है हम उससे लगातार प्रेरित हो रहे है और होते रहेगें।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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