अंतर्राष्ट्रीय सदगी दिवस

अंतर्राष्ट्रीय सदगी दिवस

  सादा जीवन उच्च विचार से व्यक्ति शांतचित व्यवहार के साथ सभी से घुलमिलकर रह सकता है। ईर्ष्या, द्वेष जैसी भावना का विस्तार यहां नही होता है। जहां रहन-सहन में ज्याद अंतर होता है वहां एक दुरीया स्वभाविक वृति से बनने लगती है। इसके बाद विचार मे भी बदलाव दिखने लगता है। जिससे धिरे-धिरे व्यक्ति एकाकी हो जाता है। इसके बाद यह व्यवस्था एक दुसरे से होते हुए विस्तारीत होने लगती है जिससे वहां के आसपास के माहौल मे परिवर्तन हो जाता है। व्यक्ति को ये पता ही नही चलता है कि कब उसके मिलने जुलने वाले बदल गये। इस प्रकार बिभिन्नता के कारण के लोग असहज महसुस करने लगते है। एक दुसरे से दुरिया बनने लगती है। लोग अपने रहन-सहन वाले के धुलते मिलते है जबकी दुसरे से अलग रहने लगते है।

  आजकल तो रहन-सहन के बदलाव के कारण कई तरह के आवास समुह बनने लगे है जिससे की वहां की आवोहवा बदली हुई लगती है। लोग इस कदर एक दसरे से खफा हो जाते है कि एक दुसरे से मिलने जुलने से भी कतराते है। इस तरह से समाज मे बैमनस्य की भावना ज्यादा बढ़ने लगी है। जिससे कारण मजबुत सामाजीक ढ़ाचा बिखने लगा है। इसको रोकने के लिए जो प्रयास किये जा रहे है उसमें से एक प्रयास सादा जीवन उच्च विचार का भी है जिससे की समाजिक समरसता भाग जागृत होगा।
 जीवन मे कठीनाईयां तो आती है और लोग एक दुसरे के सहारा बनकर समस्या का सामाधान करते हुए एक उच्च समाज का निर्माण करते है। यही समाज व्यक्ति के जीवन आदर्श को उच्च बनाता है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को व्यहार कुशल होना चाहिए। इसके लिए जरुरी है कि लोग सादा जीवन उच्च विचार के साथ जीते हुए समाज मे एक आदर्श स्थापित करे जिससे की समाज मे समरसता का माहौल बने।

  लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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