
विश्व सर्प दिवस ( World Snake Day)
विश्व भर मे सर्प दंश से मरने वालों की संख्या काफी अधिक है। एक अनुमान के मुताबिक 80,000 से 1,38,000 के बिच है जबकि अकेले भारत मे इसकी संख्या लगभग 50,000 से 60,000 के बिच है। इसमे से अधिकांश मौत यानी 97% ग्रामिण इलाके मे होती है। जिसमे विशेषकर झारखण्ड, बिहार और उत्तर प्रदेश प्रमुख है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इसमे से 15 से 29 वर्ष के युवा प्रमुख है।
दुनीयाभर मे सांपों की 38,000 प्रजातियां पायी जाती है। सांप स्थल और जल दोनो मे पाया जाता है। ये खुद अपना बिल नही बनाता है वल्कि चुहे या ऐसे ही किसी प्रकृतिक जगह मे रहता है। सांप के पैर नही होते है। सारे सांप विशेले भी नही होते है। अजगर, रेड सेंड वोआ, कॉमन वुल्फ स्नेक, धामन, दोमुंहा सांप, चेकर्ड कील बैक आदी सांप जहरीले नही होते है।
कुछ देशों मे सांप को भोजन के रुप मे भी इस्तेमाल किया जाता है। जबकी सामान्य रुप से ये मानव के भोजन के रुप मे नही आते है। सांप के जहर का प्रयोग दवा के रुप मे भी किया जाता है। सांप परिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। जिसमे ये खाद्द श्रिंखला का भाग है। किंट पंतग की बढ़ती समस्या को मेढ़क नियंत्रित करता है जवकि चुहें और मेढ़क को सांप नियंत्रित करते है। प्राकृतिक रुप से इसका नियंत्रण एक प्राकृतिक व्यवस्था बना हुआ है। इसके विगरने से समस्या पैदा हो सकती है। क्रित्रिम रुप से कीट पतंग का नियंत्रण नुकसानदेह सावित होता है जवकि प्रकृतिक रुप से इसका नियंत्रण अच्छा रहता है।
सापं के काटने से होने वाली हानी को सुरक्षा और सावधानी से कम किया जा सकता है। सांप के भेनम से एंटी भेनम दवा तैयार किया जाता है जिसकी उपलब्धता सभी जगहों पर है। समय से दंश के पहचान होते ही इसका तुरंत इलाज करने पर रोगी ठीक हो जाता है। सांप काटने के लक्षण प्रकट होने का इंतजार नही करना चाहिए। सांप के काटते ही तुरंत ईलाज के लिए एंटी भेनम दवा का उपयोग करने से सांप के बिष को फैलने से रोका जा सकता है और रोगो को भी हानी कम होती है। झाड़-फुक जड़ी बटी की व्यवस्था नुकसानदेह हो सकता है।
सांप की तगातार होती कमी को देखते हुए इसके मारने पर रोक लगा दी गई है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत सांपो को संरक्षित जीवों की श्रेणी मे रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति सांप को मारता या हानि पहुँचाता है तो 3 से 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। बिना लाईसेंस इसको रेस्क्यू करना मना है। इसके लिए मुख्य वन्य जीव वार्डेन से लिखित अनुमति लेनी परती है।
सांप के काटने पर कटे हुए स्थान के उपर तूरंत कसकर बांध दे और संभव हो तो यहां से विष के निकालने का प्रयास करे। लिकिन तुरंत एंटीभेनम दवा शुरु कर दे। इसका होमियोपैथि मे भी दवा आती है। सापं एक बार मे 200 ml तक जहर काटने पर डालता है । जबकि एक स्वस्थ्य युवा शरीर 50 ml तक की जहर को न्युट्रीलाईज कर सकता है। सांप के काटने पर यदि जहर खून मे जाता है तो नुकसानदेह होता है। यदि जहर व्यक्ति के मुंह से शरीर मे जाये और पुरे ग्रासनली मे मुंह से मलद्वार तक कोई टुट-फुट नही हो तो जहर को पचाया जा सकता है।
कहा जाता है कि सांप एक बार किसी को देख लेता है तो उसकी तस्वीर वो सदा के लिए याद रखता है। लेकिन इस तरह के बातों का कोई बैज्ञानिक प्रमाण नही मिला है। झाड़-फुक के कई मामले को हमने करीव से देखा है। इसमे ऐसा होता है कि सांप का जहर की तरह ही रोगी के शरीर मे बदलाव होता है। जवकि इसका प्रभाव भी दैवकिय होता है। इस तरह के व्यक्ति को सांप काटते किसी ने नही देखा होता है पर सारी प्रकिया उसी की तरह की होती है। इसके लिए झाड़-फुक करने वाले अपने विश्वास से इसका हल निकाल लेते है। लेकन यदि वास्तविक तैर पर सांप काट लिया हो तो उसका निदान झाड़-फुंक से नही हो सकता है। इसके लिए दवा की जरुरत होती है।
सांप काटने वाला को निंद बहुत आती है और सांप का जहर निंद मे ही ज्यादा बढ़ता है. रात को समय .यदि किसी के काटने का एहसास हो तो उसकी वारीकी से परताल करे। सांप के काटने की जगह बहुत पतली होती है जिसको वारीकी से देखने पर पता चलता। सांप के मुंह के उपरी दांत मे छीद्र होता है साप काटते समय इसी होकर आपना जहर डालता है। सांप के जहर भी सांप के प्रक्रित पर निर्भर करती है। कुछ जहर शरीर में शिरा को तोड़ता है तो कुछ खुन को तोड़ता है, तो कुछ नर्भ को प्रभावित करता है। सांप के जहर अपने प्रकृति के हिसाव से कार्य करती है। इसके फैलने मे थोड़ा समय लगता है। इसलिए इस समय का उपयोग ईलाज के लिए करना जरुरी होता है।
ज्यादातर केश मे सांप को काटने पर सांप का पता नही चलता है कि काटने वाला सांप किस प्रकृति का था। यदि ऐसा है तो तुरंत डाक्टर की सलाह ले। वैसे चहरीला सांप काटने पर शरीर में तुरंत प्रतिक्रिया शुरु हो जाती है। ऐसा भी देखा गया है कि डर के बजह से भी कई तरह के लक्षण आने लगते है लिकन वास्तुतः जो सांप काटा होता है वह जहरीला नही था। ऐसा केश हमने देखा है। इसकी पुरी परताल तो डॉक्टर ही कर सकते है इसलिए बिना देरी किये इलाज शुर करना चाहिए।
सांप यदि कही घर मे छुप गया है और पता नही चल पा रहा हो तो तेल पेराई के बाद निकलने वाले पदार्थ जिसको की खड़ी कहते है इसको जलाने पर सांप उस स्थान से बाहर चला जाता है जवकि इसके निकलने का स्त्रोत होना चाहिए ऐसा माना जाता है। बैसे सांप के रेस्क्यू करने वाले को बुलाना ज्यादा अच्छा रहेगा जिससे की उसकी पुरी प्रमाणिकता बन जायेगी। सांप अकसरहां तर चुहे को खाने के लिए पहुंचता है। यदि घर मे चुहा बहुत है तो सांप के आने की संभावना बढ़ जाती है। सांप चुहे के मल मुत्र से ये पता लगा लेता है कि चुहां कहां है। सांप को चुहे का मांस बहुत प्यारा लगाता है ऐसा माना जाता है। इसलिए वह चुहे का बिल खोजते रहता है। सांप गर्मी बढ़ने पर बाहर निकलता है। वर्षात के दिन मे भी सांप को निकलने की प्रक्रिाय देखी गई है। सांप ठंढ़ी मे बहुत कम निकलता है।
उपरोक्त जानकारी सांप के बारे मे जीज्ञासा को शांत करने तथा भ्रम की स्थिती के निवारण के लिए दिया गया है। किसी तरह की बात की कोई सवाल हो तो अपनी जानकरी कॉमेट मे दे आपको जवाव दिया जायेगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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