राष्ट्रीय ध्वज अंगीकार दिवस ( National Flag Adoption Day)
1947 में संविधान सभा की बैठक में हमारे तिरंगे को अधिकारीक तैर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रुप में अपनाया गया। इसको स्वतंत्रता सेनानी पिगली बेंकैया ने डिजाईन किया था। सबसे ऊपर केसरीया जो साहस का, बीच मे सफेद जो शांति और सत्य का, निचे हरा रंग है जो सम्रद्धी का प्रतीक है। सफेद पट्टी के केन्द्र मे 24 तिल्लीयों का चक्र है जो धर्म और प्रगति का प्रतिक है।
राष्ट्रीय ध्वज को प्रतिकात्मक तौर पर प्रयोग किया जाता है जो हमारे आंतरिक भाव को दर्शता है। इसके प्रदर्शन का आयोजन प्रमुख रुप से साल मे दो बार किया जाता है। पहला 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप मे दुसरा 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रुप में फहराया जाता है। इसको देश के सभी नागरीकों के द्वारा अपने घरों, कार्योलयों और संस्थानों में फहराया जा सकता है। बसर्ते की उसको उचीत सम्मान दिया जाय और रात मे रोशनी की प्रयाप्त व्यवस्था हो। केन्द्रीय पार्क कनॉट पैलेस नई दिल्ली, आटारी बाधा बोर्डर पर अधिक उँचे खम्भे पर लगातार 24 घंटे फहराया जाता है।
राष्ट्र को प्रतिनिधित्व करता ये ध्वज बैश्वीक स्तर पर अनेक कार्यो मे प्रतिक के रुप मे प्रयोग किये जाते है। जहां से भावनात्मक और व्यवहारिक दोने कार्य के करने मे आसानी होती है। इसका लगातार फहराया जाना हमारे स्वतंत्रता को दर्शाता है। जब राष्ट्र गुलामी मे चला जाता है तो ये ध्वत स्वतः हटा दिया जाता है। राष्ट्रीय शोक के समय ध्वत को झुका दिया जाता है। इससे संवेदना को राष्ट्रीय स्तर पर दर्शाया जाता है जिसमें किसी के सम्मान को परिलक्षित किया जाता है।
राष्ट्रीय ध्वज को लेकर आगे बढ़ते हुए खिलाड़ी अपने राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते है जिससे उसका मनोबल उच्च रहता है। उसको ये भान होता है कि सारा देश उसके साथ है। वह जो कर रहा है उसकी पहुँच पुरे देश तक है इस भाव से उसकी शक्ति मे उछाल आ जाता है। राष्ट्रीय एकता और समृद्धी को दर्शाता ये ध्वज सदा फहराता रहे हम इसकी कामना करते है।
22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज की गरीमा और उसकी शान को बनाये रखने मे जनजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जागरुकता अभियान के तौर पर मानाया जाने वाला अनोखा दिन है। हम सबकी खुशी इसके साथ है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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