अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस

अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस (International Self-Care Day)

स्वयं के प्रति जिम्मेदार होने से कार्य की सहुलियत होती है और कार्य उत्साह भी बना रहता है। इससे व्यवस्था मे होने वाले व्यवधान को नियोजित करना आसान हो जाता है। स्वयं के लिए जरुरी ज्ञान, स्वास्थ्य और साक्षारता का ख्याल रखना जरुरी होता है। मानसिक स्वास्थ्य मे मन को शांत रखना और तनाव को दुर करने के लिए कार्य व्यवस्थित करना तथा कार्य उर्जा को उच्च रखते हुए स्वयं को उत्साहित रखना जरुरी होता है। खान-पान को सही रखने से कार्यो उर्जा का प्रवाह बना रहता है और मन उल्लासित रहता है। शरीर मे छोटी-छोटी परिवर्तन दिखाई परता है जिसको हम नजर अंदाज करते है। यही पर गहराई से ध्यान देने वाला व्यक्ति समय से उसको खान पान को व्यवस्थित करके स्वास्थ्य को उत्तम बनाये ऱखता है। कहा भी जाता है की स्वास्थ्य तन में ही स्वास्थ्य मन बसता है।

जोखिम से बचाव के लिए बुरी आदतों मे सुधार के लिए सतत क्रियाशील रहने की जरुरत होती है जिससे आर्थिक नुकसान के होने से भी बचाव किया जा सकता है। इस प्रकार से स्वयं के प्रति समझ मे विस्तार होता है तो पहले की अपेक्षाकृत ज्यादा ताकत से जोखिम से निपटने की कला आ जाती है। साफ- साफाई की अभ्यास से खुद को भी अच्छी व्यवस्था मे रखने की प्रबृति बन जाती है और आसपास के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है जिससे की समाजिक प्रतिस्ठा मे विकास होता है तो मन गौरवांवित महसुस करता है।

शरीर मे होने वाले आंशिक परिवर्तन भी स्वयं के प्रति सावधानी से महसुस किया जा सकता है। जिससे की इसके सही करने का उपाय भी मिल जाता है। जरुरत के हिसाव से दाव का उपयोग भी हो जाता है। दवा को समय से लेना तथा इसके बाद किसी तरह की परेशानी को सही से डॉक्टर को समझा पाने से कार्य आसान हो जाता है। इसलिए स्वयं के प्रित निष्ठावान होने से मन मे नये-नये सुकोमल और उत्साहित करने वाला विचार आता है और कार्य को करने के लिए उमंग बना रहता है।

इस तरह आत्मविश्वास भी बढ़ता है। स्वयं के प्रति जिम्मेदारी को समय से करते हुए जो सिख मिलती है उससे दुसरो को मार्गदर्शन करने मे मदद मिलती है जिससे की समाजिक प्रितिष्टा बढ़ती है। हम अपनी तरफ से साकारात्मक विचार से दुसरे को प्रभिवित भी करते है जिससे की हमारी मित्रवत व्यवहार बढ़ता है। हमारे मिलने के  स्वभाव से लोग प्रभावित होते है और उसका मनोयोग भी क्रियांवित होकर एक उच्च भाव वाला व्यक्ति बनने मे मददगार सावित होता है।

आजकल के भागदौर भरी जिन्दगी मे स्वयं की देखभाल करना एक कठीन कार्य होता है क्योकि हम समस्या को बाहर खोजते है जबकि समस्या हमारी कीसी कमजोरी का भाग होता है जो हमारी इच्छा और संसाधन के बीच समानजस्य स्थापित करता है। इस बात को गहराई से जानने वाला व्यक्ति स्वयं की सीमा को जानता और स्वयं मे खुश रहने के लिए नियमित और संयमित रहता है। आज का खास दिन स्वयं की देखभाल करने के लिये प्रेरित करता है जिससे की भगवान को पाना भी आसान लगता है। स्वयं की शक्ति का समायोजन स्वयं के भरोसे को आत्मविश्वास की गहरीई को दर्शाता है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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