

मोबाइल वाली दुल्हन
मोबाईल के इस युग मे लोगो को अपनी बात कहने का एक आसान साधन मिल गया है। अपने भाव को दुसरों तक पहुँचाने मे इसका प्रयोग तेजी के साथ हो रहा है। हमारी भाव का प्रारुप दुसरे भाव को शेयर करने तक सिमित रह गया है। कहीं न कहीं हमारी मुल भावना का लोप दिखाई दे रहा है। फिर भी हम आजकल के भागमभाग जिंदगी को मोबाईल से दुर नही कर सकते है। यहाँ मोबाईल वाली दुल्हन के रुप मे हम आजकल के जिंदगी के एक प्रारुप को व्यक्त करने की कोशीश कर रहे है आशा है हमारी यह प्रयास आपको पसंद आयेगा।
हमारे सोच का दायरा का लगातार अतीक्रमण होता जा रहा है। जब भी हम कुछ कहना चाहते है पता नही चलता की कहा से शुरु करे। हम कोई गाना कोई ऐसा विषय को शेयर कर देते है जिससे हमारा कोई गहरा लगाव नही होता। पर यहाँ हमारा प्रयास व्यक्ति को व्यक्ति से जोड़ना है। हम अपने लेख को एक व्यापक रुप दे रहे है। आप अपने प्यार को नजदिक से महसुस करे जब ज्याद जरुरी हो तभी मोबाईल का उपयोग करे । इससे आपके अंदर संयम सुदृढ़ बिचार शक्ति का बिकाश होगा। आपके सामान्य काम काज मे होने वाली बाधा से निपटने मे दुसरों को दोष देने के बजाय आप स्वयं के प्रती जिम्मेदारी का एहसास करेंगे। जिससे आपका व्यक्तित्व में निखार आयेगा। हमारी भाव जब आपके सामने व्यक्त होती है तो उसका स्वरुप मोबाईल के बातचित से अलग होता है। आमने सामने की बातचीत मे हमे ज्यादा गहरा एहसास होता है क्योंकि बॉडीलैगुऐज का प्रत्यक्ष सामना होता है जो बहुत कुछ बिना कहे कह देता है। हम व्यक्ति के 3 डी ईमेज का फुल रुप मे बिश्लेषन करते है। अतः हमारा प्रयास है की बात दिल की दिल से हो। मोबाईल से सिर्फ सिमित सुचना का आदान-प्रदान हो।
जय हिन्द
लेखक एवं प्रेषकः- अमर नाथ साहु
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