
राष्ट्रीय हथकरधा दिवस
भारत मे कुटिर उध्योग के विकास के लिए सरकार सतत प्रयासरत रही है। इसमे हथकरधा भी सामिल है। हाथ से धागा बनाना और कपड़े बुनने की प्रक्रिया से जहां लोगो को काम मिलता है वही उसको भरण-पोषण का भी भार हलका होता है। सामाजिक समरता मे एक कदम आगे बढ़ता है क्योकि लोगो के एक समुह एक विचारघारा से जुड़कर अपना जीवनयापन करते है।
बिना विजली के हाथ या पैर से चलने वाला करधों का उपयोग पार्यावरण के लिए लाभकारी होता है। इसमे प्राकृतक रुप से उपलब्ध कपास, रेशम, और ऊन जैसे रेशों का उपयोग किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे ग्रमीण और अर्ध-ग्रमीण क्षेत्रों मे रोजगार के अवसर प्राप्त होते है। कपड़े में अनुठापन, कारीगरी और सुक्ष्म डिजाईन का समावेश मिलता है। कलात्मकता के हिसाव से लोग अपने जरुरत के अनुसार से समान का निर्माण करते हुए उसको अपयोग करते ह जिससे की विदेशी निर्भरता कम होती है।
भारत की प्राचीन संस्कृतिक, परंपरा और स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक माना जाता है। इसके विकास के लिए सतत प्रयास किये जाते रहे है। भारत मे कथकरधा रोजगार के विकास के प्रायप्त अवसर है। इसके विधिवत व्यवस्था के साथ बाजार की भी उपलब्धता हो और लोगो मे जाकरुकता हो की वो इस तरह के समान की खरीद को तरजीह दे। इसके लिए प्रचार प्रसार की जरुरत है। सरकार इस क्षेत्र मे कदम उठाती है लेकिन इसके उन्नत विकास के लिए अभी भी ध्यान देने की जरुरत है। सरकार को इस तरफ ध्यान देते हुए इसके विरतण तथा बाजार को उन्नत बनाना चाहिए।
महात्मा गांधी जी ने खुद सुतकाटकर कपड़े बुने और जन मानस को ये संदेश दिया कि स्वदेशी का उपयोग करो और विदेशी समान का वहिस्कार करो। इससे भारत के बास्तविक विकास की अवधारना को बल मिला। सस्ते समान के उपयोग के लालच मे परकर राष्ट्रीय नुकसान को बचाने का इससे अच्छा और कोई रास्ता नही था। इस आन्दोलन ने ब्रिटिस सरकार की नीव हिला दी थी। आज भी भारत मे कुटीर उध्योग की अपार संभावना है।
7 अगस्त के इस दिन को विशेष रुप से हथकरधा के विकास तथा लोगो को रोजगार के अवसर देने तथा प्राकृतिक संसाधन पर निर्भरता से स्वास्थ्य परक बस्तु के उपयोग के लिए बनाया गया है। इसको जागरुकता के साथ समाज के नये पिढ़ी को समझाने तथा उससे जोड़ने की जुरुरत है जिससे की इसके विकास की उच्चता के साथ सुख और शांति की व्यवस्था को बनाया जा सके।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः-
- स्व देखभाल के लिए आत्मनिर्भरता जरुरी है इसके लिए जरुरी उपाय करने होते है।
- युवा के कौशल विकास के लिए जरुरी प्रशिक्षण जरुरी है इसको समझना होगा।
- मत्स्य पालन आत्मनिर्भरता के लिए भी उपयोग है इसकी उन्नत तकनीक जानाने की जरुरत है।
- परिवार के पोषण के लिए स्वरोजगार एक जरुरी उपाय है इसको गहराई के समझना होगा।