
विश्व हिरोशिमा दिवस
वैश्विक तनाव ने मानव को ऐसा जख्म दिया जिसकी याद शदियों तक की जाती रहेगी। 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर सुवह के समय अमेरिका के बम वर्षक द्वारा परमाणु बम गिराया गया। जिसमे काफी जानमाल का नुकसान हुआ। बम गिरने के ततछन हुई मौत के बाद भी उसके रेडियेशन से भी काफी मौते हुई। एक साल बाद तक लगभग 1,40,000 लोगों की जाने गई। इस घटना के बाद युद्ध तो समाप्त हो गया लेकिन दुनिया को देशो में परमाणु बम बनाने की होर लग गई। कई देशों के द्वारा इस तरह की घटना को रोकने के लिए सुरक्षा प्रणाली बनाया जाने लगा।
विश्व के सभी देश ऐक-केन प्रकारेण परमाणु बम बनाना चाहते थे। जिसमे कई देश को सफलता भी मिली। इसके बाद भी इसकी होड़ कम नही हुई। ऐसा माने जाने लगा की जिस देश के पास अपना परमाणु बम है वह सुरक्षित है। इसके लिए अभी भी कोशिश की जा रही है। मानव के इतिहास मे इस धटना को इस शदी की सबसे बड़ी धटना के रुप मे याद किया गया।
किसी भी देश के लिए एक क्षण मे एक बड़े क्षेत्रफल के लोगो का मरना सबसे दुखद घटना मान जाती है इस ये सबसे भयावह और दुर्दान्त घटना थी। इसमे ऐसे लोग मारे गये जो सैनिक नही थे। जो देश के आम नागरिक थे। जिनका राजनैतिक जीवन से सायद ही कोई लगाव हो लेकिन एक देश के नागरिक होने का उनको मुल्या चुकाना पड़ा। इसलिए देश के हर गतिविथि पर नागरिक की नजर होनी चाहीए। देश है तो ही हम सुरक्षित है। जापान ने इस घटना के बाद खुद को परमाणु बम बनाने तथा हथियार रखने से ही परेहेज किया। समय के परिवर्तन ने आज विश्व के अधिकांश देश को फिर वही लाकर खड़ा किया है।
वर्तमान समय मे ऐसे हालात बनने लगे है कि एक बार फिर इसकी आहट सुनाई देने लगी है। बैश्विक तनाव के बढ़ते कदम ने लोगो मे चिंता बना दी है। इसके लिए अब सभी देश हथियार की होर मे जुट गये है। इस तरह की घटना को रोकने की जरुरत है। आज का दिन मानव त्रासदी के रुप मे याद किया जाता है। ऐसे मे लोगो को इस घटना को याद करने और मानव विकास के लिए इस तरह की घटना को रोकने के लिए कोशिश करने के उदेश्य से आज के दिन को चुना गया है। आने वाले पीढ़ी को जगरुक करने और एक स्वस्थ्य मानव समाज का निर्माण करने मे अपनी भूमिका निभाने के लिए आज का दिन विशेष जागरुकता का है।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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