
भारत का 80 वां स्वतंत्रता दिवस (80 th independence day of India)
भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री तेरवी वार देश को संवोधित कर रहे है। स्वतंत्र भारत के इतिहास मे पहली बार लाल किले के प्राचीर से राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम का सामूहिक गायन किया गया जो 150 साल पुरानी परंपरा को समर्पित है। इस वर्ष के समारोह का मुख्य थिम है विकसित भारत 2047 और युवा शक्ति। इस बार लगभग 50 हजार विशेष अतिथियों को आमंत्रण किया गया जिसमे युव, महिला उघ्यमी और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थि सामिल है।
भारत के स्वतंत्रता को अच्छूण बनाये रखने के लिए लगातार प्रयास किये जाते रहे है और ये आगे भी जारी रहेगा। विदेशी ताकते तरह-तरह के उपाय लगाकर भारत को तोड़ने की कोशिस में लगे हुए है। हमे जिस समय स्वतंत्रता मिली थी उसय ब्रिट्रेन अपनी उच्च मानसिकता के कारण द्वितीय विश्व युद्ध मे करजोर हो गया। फलतः उसकी दशा और दिशा बदल गई और भारतीय जनमानस मे जागृत के संचार का शंखनाद गो गया। भारतीय जनमानस की जागृति के कारण ही एक आन्दोलन ने देश को एक सुत्र मे बांध दिया और एक स्वर से आजादी की मांग उठने लगी जो एक आवाज बनाकर भारत के स्वतंत्रता दिला दिया।
आज भी भारत को एक सुत्र मे बांधे रहना है जिससे की विदेशी ताकते को अपनी पैठ बनाने मे मदद नही मिले। आजकल के गुलामी का स्तर आर्थिक हो गया है। जहां पर विदेशी ताकते आपनी भाड़ी भरकर कर्ज का दवाव बनाकर सामरिक मह्त्व के वस्तू पर अपना कब्जा बना लेता है और देश आर्थिक गुलामी की तरफ बढ़ जाता है। इसके बाद पुर्ण गुलामी की तो बहुत ही भयावह होती है जहां पर आर्थिक, शरीरिक, और मानसिक के साथ ही सास्कृतीक शोसन भी होता है। इसको रोकने के लिए हमे सतत सहज और सतर्क रहना होगा और अपने हित को साधने के लिए प्रयास करते रहने होंगे।
इस बार का थिम विकसित भारत 2048 और युवा शक्ति रखा गया है। इस भाव से राष्ट्र के कार्य को युवा शक्ति को मुख्य फोकस मे रखकर कार्य को किये जा रहे है इससे कार्य कुशलता के साथ त्वरित गति से होने मे भी मदद मिलेगी। शोध और नयी तकनीक के लिए ध्यान और ज्ञान की विविधता को बल मिलेगा। बहुआयामी बिकास के लिए ये एक अच्छा कदम है। आशा है कि देश अपने मिशन के तरफ आगे बढ़ात रहेगा और कार्य की गति बाधित नही होगी।
बैश्विक चुनौतियां कम नही है लेकिन एक मजबुत और सुनोयोजित व्यवस्था के साथ लक्ष्यो को हासिल करना मुश्किल भी नही है इसके लिए व्यक्तिगत राजनिति से उपर उठकर आगे आना होगा और सभी को राष्ट्र निर्माण मे एक बार फिर जोर-शोर से लगना होगा जिससे की एक विकिसत भारत के लक्ष्य को एक निर्धारित समय पर पुरा किया जा सकेगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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