अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस

आज का युवा ही कल का भविश्य बनता है। इसके लिए इसको शिक्षा, रोजगार और सामाजिक तथा आर्थिक भागिदारी को सुनिश्चित करने की जरुरत होती है। युवा के पास जीवन के हर क्षेत्र मे जाने के लिए बुनियादी शिक्षा दी जाती है। जब युवा अपना शिक्षा पुरा कर लेता है तो उसके ऊपर परिवारिक और समाजिक दायित्व आ जाता है। इसके लिए उसको आर्थिक व्यवस्था की जरुरत होती है। इसके लिए रोजगार एक प्रमुख तथ्य है। रोजगार स्वतः हो या सरकारी या निजी कम्पनी में उसके आर्थिक जरुरतो को पुरा करने के लिए जरुरी है।

भारत एक विशाल देश है यहां की भेष-भूषा, रहन-सहन और बोली भी अगल है पर यह एक कृषि प्रधान देश है। यहां की ज्यादतर आवादी कृषि पर निर्भर है। युवा भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कृषि कार्य मे लग जाता था। लेकिन कृषि की हालत खराब है। सरकार के उदासीन रबैया के कारण कृषि को कर पाना अब संभव नही है। मजदुरी की खर्च बहुत हो गयी है इसके अनुपात मे बाजार उपब्ध नही है। इसके कारण युवा बेरोजगार हो रहे है। आजकल कम्पनी मे कम बेतन पर कार्य करने को मजबूर है।

जितने भी क्षेत्र है आमदनी के वहां पर भीड़ बढ़ती जा रही है। क्योकि शिक्षा के बाद रोजगार प्रमुख मुद्दा रहता है। इसके लिए सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयास काफी नही है। जनसंख्या नियंत्रण भी एक समस्या है पर युवा को दिशा निर्देश करने के लिए सतत उपयुक्त प्रयास करने की जरुरत है। हमारे देश मे जो लोग शिक्षा प्राप्त कर रहे है उसके समायोजन के लिए सरकार को उपयुक्त कदम उठाना चाहिए। व्यवसाय के नये-नये रास्ते को बनाने की जरुरत है जिससे समाज के हर वर्ग के लोग व्यवसाय से जुड़कर लाभ कमाये। परंपरागत व्यवसाय मे लोग रुची लेते है लेकिन इसके भी आधुनिकरण की आवस्यकता होती है जिससे की इसको बड़ा बजार मिल सके और इसकी आर्थिक उन्नती हो सके।

एक स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा की जरुरत है जिससे की योग्य और प्रतिभावान व्यक्ति सही जगह पर पहुँचे जहां से रोजगार के नये अवसर श्रृजीत हो। शोध की जरुरत है जिससे की रोजगार के नये-नये क्षेत्र का विकास हो और उसका क्रियान्यावन भी सही से हो जिससे की सबको रोजगार मिले। पुरे प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरुरत है जिससे की लोगो मे असंतोष नही फैले और सब ओर लोगो को ध्यान लगा रहे जिससे की विकास की धारा सतत चलती रहे। युवा को कॉन्सेलिग की जरुरत है जिससे की वे अपने रुची के क्षेत्र मे कार्य को करे जिससे की उसको आगे बढ़ने मे काफी सहयाता होगी और वो एक कुशल व्यक्ति के रुप मे स्थापित होगें।

युवा शक्ति को पहचानना होगा और उसके समुचित विकास के लिए सतत क्रियाशीलता को गति देनी होगी। विकास की सही दिशा तथा लोगों का जराव के साथ एक मजबूत और उपयोगी व्यवस्था की जरुरत है। युवा को दिशा निर्देशित करने तथा एक योग्य व्यक्ति के निर्माण में परिवार और समाज की भूमिका के उत्तरदायीत्व को समझाने के लिए ही 12 अगस्त के दिन को खास बनाया गया है।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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